राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) में ओमआर शीट मे गड़बड़ी करके नंबर बढ़ाने के मामले में सीएम भजनलाल शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ओएमआर गड़बड़ी का पता तो साल 2019 में ही चल गया था। उत्तर प्रदेश पुलिस ने गैंग का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान सरकार को इस गड़बड़ी की सूचना दे दी थी। मैं विपक्ष के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पूछना चाहता हूं कि वह साढ़े चार साल तक मामले को दबाए क्यों बैठे रहे। यह आपकी कौनसी नैतिकता थी। आपने यूपी एसटीएफ की सूचना पर कार्रवाई क्यों नहीं की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रविवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर सांगानेर स्थित कैम्प कार्यालय में नव मतदाताओं का संबोधित कर रहे थे। हम किसी को भी छोड़ने वाले नहीं है
सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि ओएमआर गड़बड़ी के मामले में अगर हम मुकदमा दर्ज नहीं करते तो आरोपी कभी पकड़े भी नहीं जाते। हमने पेपरलीक में 400 लोगों को पकड़ा हैं। यह काम अभी बंद नहीं हुआ हैं। आप चिंता मत कीजिए, हमें जहां तक जाना होगा, हम वहां तक जाएंगे। आज, कल और भविष्य में जिसने भी गड़बड़ी की है, उसको किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। सीएम ने कहा कि हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति बिलकुल स्पष्ट है। जो कोई भी अपराध करेगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो उसे कानून के अनुसार सख्त सजा मिलेगी। एसओजी ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया था
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए OMR शीट में नंबर बढ़ाने वाली गैंग का खुलासा किया था। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तकनीकी प्रमुख सहित 5 लोगों को एसओजी ने अरेस्ट किया था। जो तीन भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा कर 38 अभ्यर्थियों की सरकारी नौकरी लगा चुके हैं। टीम ने दो आरोपियों के पास से 60 लाख रुपए और डॉक्यूमेंट जब्त किए थे। गहलोत ने राजनीति का आरोप लगाया था
ओएमआर शीट में गड़बड़ी के मामले में पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कर्मचारी चयन बोर्ड के कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद अब इस अवधि में हुई सभी परीक्षाओं की जांच करवाने की मांग की थी। गहलोत ने भाजपा सरकार पर पेपरलीक मामले में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए। गहलोत ने एक्स पर लिखा था- राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में ओएमआर शीट बदलने के खुलासे ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसओजी की रिपोर्ट के अनुसार 9 साल पहले यानी 2018 से पूर्व की भाजपा सरकार से शुरू हुआ यह खेल 2026 तक जारी रहा है, जो बेहद ही चिंताजनक तथ्य है। जो कर्मचारी इस फर्जीवाड़े में लिप्त थे, वे 2024 और 2025 में भी सक्रिय और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पोस्टेड थे।


