नायका की फाउंडर और सीईओ फाल्गुनी नायर ने कहा:भारत नई कैटेगरी, नए कंजम्पशन बिहेवियर के दौर में है; यह वक्त किनारे खड़े होकर इंतजार करने का नहीं

फैशन ब्रांड नायका की फाउंडर और सीईओ फाल्गुनी नायर ने 50 साल की उम्र में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग का सफल करियर छोड़कर नई शुरुआत की। उन्हें 20 साल तक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग क्षेत्र में किए गए अपने काम के अनुभव का भी फायदा मिला। ज्यादातर इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स यह मानते हैं कि नए बिजनेस की शुरुआत की सबसे सही उम्र 25-35 साल होती है। फाल्गुनी ने इसे गलत साबित किया। आज नायका भारत की प्रमुख ब्यूटी और वेलनेस कंपनी बन चुकी है। 50 में शुरुआत: जब सब कह रहे थे ‘ऑनलाइन लिपस्टिक नहीं बिकेगी’, तब मैंने भरोसे का बिजनेस बनाया मैंने हमेशा कैलकुलेटेड रिस्क लिया है। मेरे लिए रिस्क जज्बातों में बहकर लिया गया फैसला नहीं, बल्कि तैयारी, मजबूत कन्विक्शन और फिर एक्शन लेने की हिम्मत है। जब मैंने नायका शुरू की, तब मेरा ब्यूटी, रिटेल, टेक्नोलॉजी या एंटरप्रेन्योरशिप का बैकग्राउंड नहीं था। लेकिन मुझे मेरे आइडिया पर भरोसा था। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के वर्षों ने मुझे रिस्क असेसमेंट, बिजनेस फंडामेंटल्स और डेटा के आधार पर फैसले लेना सिखाया। मैं मानती हूं कि आप तैयारी से खुद को मजबूत बना सकते हैं, लेकिन हालात हमेशा आपके मुताबिक नहीं होते। शुरुआत से पहले सारे जवाब नहीं मिलते। जरूरी है कि आप होमवर्क करें, डाउनसाइड समझें और फिर कदम उठाएं। भारत इस समय नई कैटेगरी, नए कंजम्पशन बिहेवियर और नई संस्थाओं के निर्माण के दौर में है। यह वक्त किनारे खड़े होकर इंतजार करने का नहीं, बल्कि बदलाव की लहर में उतरने का है। दुनिया उन्हें रिवॉर्ड करती है जो रिस्क लेते हैं, जल्दी सीखते हैं और लंबे समय तक कमिटेड रहते हैं। 13 साल पहले ऑनलाइन ब्यूटी कैटेगरी में भरोसा बनाना मुश्किल था। भारत में ब्यूटी पूरी तरह ऑफलाइन थी-टच, फील और स्टोर एडवाइस पर आधारित। सवाल उठते थे कि ऑनलाइन लिपस्टिक कौन खरीदेगा? निवेशकों को भी स्केलेबिलिटी पर शक था। लेकिन मैंने सीखा कि जहां संशय होता है, वहीं संभावनाएं छिपी होती हैं। इस दौर में कोटक महिंद्रा में काम करने से मिली सीख बहुत काम आई। मैंने जाना कि अगर कंज्यूमर की समस्या सही पहचानी गई है और बिजनेस का गणित ठीक है, तो शॉर्ट-टर्म संशयों से नहीं भटकना चाहिए। शुरुआत में नतीजे धीमे रहे, कई प्रयोग असफल हुए, लेकिन मैंने उन्हें फेलियर नहीं बल्कि लर्निंग माना। जल्दी समझ आया कि भारत में ब्यूटी को स्केल से पहले भरोसे और सही जानकारी की जरूरत है। मेरे लिए असफलताएं स्टॉप साइन नहीं, बल्कि डेटा पॉइंट्स हैं। शुरुआती करियर को लर्निंग फेज मानना चाहिए, परफॉर्मेंस फेज नहीं। मजबूत फंडामेंटल्स-कंज्यूमर, डेटा और एक्जीक्यूशन-पर फोकस करें, नतीजे खुद आएंगे। नायका के सफर में मेरे रोल मॉडल महिलाएं और जेन-Z रहे हैं। क्यूरियोसिटी और लगातार सीखने की आदत मेरे करियर का सबसे बड़ा हथियार रही है।

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