दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला में वन्यजीव अधिनियम व बाघों के व्यवहार की जानकारी दी

धौलपुर| धौलपुर-करौली टाइगर रिज़र्व (डीकेटीआर) के फ्रंटलाइन फील्ड स्टाफ की कार्यक्षमता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से धौलपुर–करौली टाइगर रिज़र्व में संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए फ्रंटलाइन क्षमता सुदृढ़ीकरण विषय पर दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मुख्य वन संरक्षक पी काथिरवेल एवं उप वन संरक्षक डॉ आशीष व्यास के निर्देशन में टाइगर रिज़र्व प्रशासन द्वारा टाइगर वॉच के सहयोग से आयोजित की गई कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य फील्ड स्टाफ को बाघों की पारिस्थितिकी एवं व्यवहार की वैज्ञानिक समझ प्रदान करना, बाघ संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना, वन्यजीव संरक्षण की आवश्यकता पर दृष्टिकोण विकसित करना तथा वन्यजीव अपराध, मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन एवं शमन तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी देना था। डॉ धर्मेंद्र खंडाल ने बाघ संरक्षण का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य, बाघ की पारिस्थितिकी एवं व्यवहार, मानव–वन्यजीव संघर्ष की प्रकृति तथा उसके प्रभावी प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत व्याख्यान दिए। वन्यजीव अपराधों एवं अवैध शिकार की रोकथाम, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया तथा फील्ड स्टाफ के अधिकार एवं कर्तव्यों पर राजू सिंह राजपूत (एसटीएसएफ मध्य प्रदेश) द्वारा विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। कार्यशाला के दौरान टाइगर वॉच द्वारा फील्ड स्टाफ को रेस्क्यू वाई-स्टिक, स्नेक टोंग्स, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की पुस्तिका तथा “बाघों का संसार” पुस्तक का वितरण किया गया।

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