बूंदी के नैनवां क्षेत्र के भजनेरी पंचायत में स्थित चीता की झोपड़ियां गांव में प्रशासनिक लापरवाही चरम पर है। पिछले चार साल से गांव की मुख्य सड़क पर जमे कीचड़ ने लोगों का आना जान मुश्किल कर रखा है। स्थिति इतनी भयावह है कि रविवार सुबह एक ग्रामीण की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाने से पहले JCB से सड़क को साफ कराना पड़ा। गांव में बीमारी के कारण ग्रामीण ब्रह्मानंद मीणा (52) की मौत हो गई। रविवार सुबह उनके अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। श्मशान भूमि तक जाने के लिए ग्रामीणों को करीब 200 मीटर कीचड़ से भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। हालात को देखते हुए ग्रामीणों ने शव यात्रा निकालने से पहले जेसीबी बुलाकर सड़क पर भरे हुए कीचड़ को साफ कराया। उसके बाद भी सड़क पर जमा कीचड़ से बड़ी दिक्कतों के साथ शवयात्रा निकाली गई। मृतक के रिश्तेदार महावीर मीणा ने बताया कि चार साल से मकान के बाहर से ही आम रास्ते में इतना कीचड़ हो रहा है। शवयात्रा की निकालने से पहले जेसीबी बुलाकर एक -एक फिट कीचड़ को साफ करवाया। इसके बाद अंतिम संस्कार की यात्रा रवाना हुई। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूली बच्चों को रोजाना कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ता है। आए दिन कई लोग फिसलने से हादसे का शिकार हो जाते हैं। गंभीर बात यह है कि कीचड़ के कारण एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ दबंग लोगों द्वारा नालियां बंद कर दी गई हैं, जिससे यह समस्या और भी विकराल हो गई है। जेसीबी के सामने मरने के बैठ जाते हैं अतिक्रमणकारी
बजनरी गांव के सरपंच जितेंद्र मीणा ने बताया कि गांव के प्रत्येक व्यक्ति ने नाली पर अतिक्रमण कर रखा है। अतिक्रमण को हटाने के लिए मौके पर गए भी थे, लेकिन ग्रामीण जेसीबी के सामने मरने के लिए बैठ जाते हैं। इसलिए अतिक्रमण नहीं हटा पाते हैं। हालात से उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखा है।


