बाड़मेर.वर्तमान की तस्वीर में पहाड़ी की तलहटी में 30 से अधिक अतिक्रमण व पक्के मकान दिख रहे हैं। जिला कलेक्टर ने 30 जनवरी को आदेश जारी कर राजकीय कार्यालयों एवं आवास के लिए आरक्षित राजकीय भूमि जो बाड़मेर-मुनाबाव रोड शनिदेव मंदिर के पास, डोला डूंगरी के क्षेत्र, राजकीय भूमि, पहाड़, वन विभाग, नदी नाले की भूमि तथा नगरपरिषद की भूमि पर अवैध कॉलोनी एवं प्लॉट काटकर बेचने आदि के संबंध में कार्रवाई करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की। इस कमेटी में बाड़मेर के उपखंड अधिकारी वीरमाराम को अध्यक्ष तथा अन्य तीन सदस्य है। चैतन्य मोहन केवलिया | बाड़मेर शहर में जगह-जगह हुए अतिक्रमण को लेकर प्रशासन अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। ढुलमुल कार्यप्रणाली के कारण सरकारी जमीन के साथ साथ इन अतिक्रमियों ने प्राकृतिक धरोहरों को भी नहीं छोड़ा है। शहर में बढ़ रहे अतिक्रमणों के लेकर भास्कर टीम ने जब पड़ताल की तो सामने आया कि पिछले दस सालों में अतिक्रमियों ने योजनाबद्ध तरीके से एक पैटर्न बनाकर सरकारी जमीनों के साथ साथ प्राकृतिक संपदाओं को भी नहीं छोड़ा। बाड़मेर. 2011 में डोला डूंगरी पहाड़ी की सेटेलाइट तस्वीर, इसमें एक-दो घर दिख रहे हैं। शहर के गडरा रोड स्थित डोला डूंगरी पर तथा आस-पास के क्षेत्र में बढ़ रहे अतिक्रमण को लेकर नगरपरिषद और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई की थी। जिसमें वर्ष 2020 और 2021 में अतिक्रमियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में कब्जा करने की नीयत से जिन लोगों ने बाड़े और पत्थर रोपकर दीवारें कर बाड़े बना दिए थे, उन्हें हटाने की कार्रवाई की थी। 2021 में लगभग 30 अतिक्रमण हटाए थे। लेकिन उसके बाद से कोई कार्रवाई नहीं की गई। शहर के गडरा रोड पर स्थित डोला डूंगरी पहाड़ अतिक्रमियों के अवैध कब्जे का उदाहरण है। अतिक्रमियों ने इस पहाड़ के आस-पास बाड़े बनाए, फिर इन बाड़ों ने दुकानों का रूप लेना शुरू किया। दुकानों के बाद मकान और धीरे धीरे कई लोगों की बस्ती इस पहाड़ पर बसनी शुरू हो गई। जैसे-जैसे मकान और दुकानें बनने लगी वैसे-वैसे पहाड़ की कटाई की गई। अब स्थिति यह है कि डोला डूंगरी की सिर्फ चोटी ही बची है।


