बैतूल में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून के विरोध में सर्व समाज के युवाओं ने मोर्चा खोल दिया है। सौरभ सिंह राघव के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। युवाओं ने आरोप लगाया कि यह नया नियम छात्र जीवन में जहर घोलने जैसा है। इससे समाज जुड़ने के बजाय जातियों में बंटेगा और निर्दोष छात्रों को झूठे मामलों में फंसाने का डर बना रहेगा। अधिवक्ता कलश दीक्षित और रजनीश जैन ने बताया कि यूजीसी का यह नया नियम 15 जनवरी 2026 से देशभर में प्रभावी हो गया है। इसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘समानता समिति’ का गठन अनिवार्य किया गया है। इस समिति में ओबीसी, महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधि शामिल होंगे। नियम के मुताबिक, आरक्षित वर्ग के छात्र जातिगत भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकेंगे और समिति हर 6 महीने में रिपोर्ट यूजीसी को भेजेगी। नियम का पालन न करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई होगी। वोट बैंक की राजनीति का आरोप युवा नेता रफी अहमद और आशीष देशमुख ने चिंता जताई कि इस कानून से अगड़ी जातियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इस कानून का दुरुपयोग कर निर्दोष छात्रों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है, जिससे कॉलेज कैंपस में आपसी भाईचारा और सामंजस्य खत्म हो जाएगा। युवाओं ने इसे सत्ताधारी दल की वोट बैंक राजनीति करार दिया है। सड़कों पर उतरने की चेतावनी ज्ञापन सौंपने आए युवाओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि यह कानून वापस नहीं लिया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई, तो इसका असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिलेगा।


