लुधियाना | किदवई नगर की 21 वर्षीय विवाहिता के साथ कथित मारपीट और घरेलू हिंसा का गंभीर मामला सामने आया है। वह दो माह की गर्भवती थी। पीड़िता के मुताबिक परिवार के कई सदस्यों ने उससे हाथापाई की, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। पीड़िता का आरोप है कि वह मदद के लिए जनकपुरी चौकी और बाद में थाने भी गई, लेकिन समय पर मामला दर्ज नहीं किया गया। प्रीति ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उसे न्याय चाहिए, ताकि उससे हुई कथित ज्यादती करने वालों को उनके किए की सजा मिल सके। वहीं इस मामले में डिवीज़न 2 के थाना प्रभारी जसबीर सिंह का कहना है की पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए गए है। मामले को वेरिफाई कर आरोपियों पर बनती कार्रवाई करेंगे। “मेरी लवमैरिज डेढ़ साल पहले हुई थी। जिस से हमें एक बच्चा भी है, राघव। जैसे जैसे समय बीतता गया, ससुराल वाले मुझे दहेज के ताने देते, नौकरों की तरह काम करवाते। मारते भी थे। वीरवार को भी ऐसा ही हुआ, मैं 2 माह की गर्भवती थी। मेरी तबियत ठीक नहीं थी, मैं आराम कर रही थी। इतने में मेरी सास ने मुझे काम करने को उठाया। मैंने जब तबीयत ठीक नहीं होने की बात कही तो, मुझे इन्होंने थप्पड़ मारा। मेरी ननद ने भी सास से बदतमीजी का आरोप लगाते हुए भी पीटा। पूरे परिवार ने मेरे पेट पर लात-घूंसे बरपाए। मेरा बच्चा पेट में ही मर गया। दर्द से हांफती हुई मैं जनकपुरी चौकी गई, उन्होंने उस समय मेरे बयान नहीं लिखे। एफआईआर नहीं दर्ज की। मेंने अपने मायके बताया जिन्होंने मुझे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया। कार्रवाई के नाम पर कभी संडे तो कभी रिपब्लिक डे का बहाना दिया। मुझे थाने आ कर बयान देने को कहा। मैं थाने जाने की हालत में नहीं थी। 5 दिन बाद मंगलवार को एक महिला और एक पुरुष मुलाजिम आए। मेरी बहन बयान दर्ज होने की वीडियो बना रही थी, तब पुलिस वाले हमें ही कहने लगे वीडियो नहीं बनाओ, खुद पर कार्रवाई मत करवा लेना। मैंने कहा, बयान में क्यों नहीं लिखा, मेरा बच्चा मर गया है, तो बोले-डॉक्टर की रिपोर्ट में आएगा, हम नहीं लिख सकते। यह भी नहीं लिखा की पहले मैं चौकी गई थी। मुझे इन्साफ चाहिए।” – जैसा पीड़ित प्रीति ने भास्कर को बताया।


