भास्कर न्यूज | अलवर रामकिशन कॉलोनी काला कुआं स्थित वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम के 10 वें स्थापना दिवस पर 7 दिवसीय कार्यक्रम बुधवार से शुरू होंगे। बुधवार को भगवान वेंकटेश जर्मन सिल्वर से बने में रथ में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस अवसर पर श्रीमद भागवत कथा और सम्मान समारोह का आयोजन होगा। दिव्य धाम के प्रमुख स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने बताया कि सुबह 6 बजे भगवान वेंकटेश बालाजी की प्रतिमा का अभिषेक के साथ मंदिर के स्थापना दिवस के कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके बाद दक्षिण भारत से आने वाले फूलों भगवान वेंकटेश बालाजी की प्रतिमा का शृंगार किया जाएगा। आरती के बाद अशर्फी धाम अयोध्याधाम से आए स्वामी धराचार्य महाराज रथ का पूजन करेंगे। इसके बाद भगवान वेंकटेश बालाजी की 18 इंच ऊंची चल प्रतिमा, भूदेवी और 50 किलो वजनी व 27 इंच ऊंची लड्डू गोपाल की प्रतिमा जर्मन सिल्वर से बने में रथ में विराजित की जाएंगी। सुबह 9 बजे रथयात्रा रवाना होगी। रथयात्रा में घोड़े, बैंड, वेद मंत्रों का उच्चारण करते वेद विद्यालय के विद्यार्थी, भगवान राम की वानर सेना और आखिर में श्रीजी का रथ होगा। रथयात्रा के अग्रवाल धर्मशाला पहुंचने पर कलश लिए 1500 महिलाएं शामिल होंगी। रथयात्रा प्रमुख मार्गों होती हुई वापस वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि बुधवार से 3 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक वे श्रीमद् भागवत कथा होगी। 29 जनवरी को सुबह 8 बजे ध्वजारोहण, श्रीजी की प्रतिमा का अभिषेक होगा। 30 जनवरी से 1 फरवरी तक प्रतिदिन सुबह 8 बजे दिव्य प्रबंध के पाठ और श्रीजी का अभिषेक होगा। 3 फरवरी को 81 कलशों से भगवान वेंकटेश बालाजी की प्रतिमा का अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान वीरांगनाओं, वरिष्ठ नागरिकों और प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और वन मंत्री संजय शर्मा भाग लेंगे। रथ में लगे हैं हवाई जहाज के पहिए वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम ट्रस्ट के प्रमुख स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने बताया कि सुमेरपुर पाली 2019 में जर्मन सिल्वर से रथ बनकर आया था। इस रथ की विशेषता यह है कि इसमें हवाई जहाज के पहिए और ब्रेक लगे हुए हैं। यह रथ 12 फीट लंबा, 8 फीट चौड़ा और 14 फीट ऊंचा है। साढ़े 6 फीट ऊंची है वेंकटेश बालाजी की प्रतिमा रामकिशन कॉलोनी काला कुआं स्थित वेंकटेश बालाजी दिव्यधाम में भगवान वेंकटेश बालाजी की साढ़े 6 फीट ऊंची प्रतिमा है। यह काले ग्रेनाइट की प्रतिमा है। यह अचल प्रतिमा है। यह प्रतिमा दक्षिण भारत के कांचीपुरम, तमिलनाडु से बनकर आई है।


