व्यापमं घोटाला:फर्जी निवास प्रमाण पत्र लगाकर बना डॉक्टर, तीन साल की सजा

भोपाल कोर्ट ने व्यापमं घोटाले के आरोपी डॉक्टर सुनील सोनकर को 3 साल की सजा सुनाई है। साथ ही दो हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। फैसला अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने सुनाया है। आरोपी डॉक्टर ने उत्तर प्रदेश का निवासी होते हुए मध्य प्रदेश का फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया। और व्यापमं द्वारा आयोजित प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में प्रवेश लिया। आरोपी मौजूदा समय में सागर जिले में डॉक्टर है। इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुधा विजय सिंह भदौरिया और आकिल अहमद खान ने पैरवी की है। घटना 1 जनवरी 2010 से 30 जुलाई 2010 के बीच की है। इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एसटीएफ में शिकायत की थी। इसमें उन्होंने एसटीएफ को फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाकर पीएमटी में प्रवेश लेने वालों की सूची दी थी। इसमें बताया गया था कि आरोपी द्वारा 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तर प्रदेश (यूपी) बोर्ड से पास की गई है। आरोपी ने खुद का पता रीवा का होना बताया था। इस मामले में जांच के बाद एसटीएफ की टीम ने 24 जनवरी 2020 को आरोपी डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अब तक 5000 मरीजों का कर चुका है इलाज कोर्ट में सामने आया कि आरोपी डॉक्टर सुनील सोनकर फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र के आधार पर डॉक्टर बना था। ट्रायल के दौरान सामने आया कि आरोपी फर्जी तरीके से डॉक्टर बनने के बाद भी 5 हजार लोगों का इलाज कर चुका है। हालांकि कोर्ट का कहना है कि फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र लगाकर आरोपी ने परीक्षा दी है। मूल निवास प्रमाण पत्र ने आरोपी को परीक्षा पास करने में मदद नहीं की है। वो उसकी उपयोगिता से पास हुआ है। ग्वालियर निवासी महिला डॉ. ने दायर की थी याचिका आरोपी डॉक्टर को सशर्त राहत, देश छोड़ने पर रोक बरकरार व्यापमं घोटाले से जुड़े एक और मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी महिला डॉक्टर को सशर्त राहत प्रदान की है। हाई कोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस हिमांशु जोशी ने स्पष्ट किया है, कि केवल संदेह के चलते किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। यदि याचिकाकर्ता निर्धारित समय-सीमा में ग्रामीण सेवा बॉन्ड की राशि जमा करती हैं, तो केवल जांच लंबित होने के आधार पर उन्हें अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने जांच एजेंसियों की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए देश छोड़ने पर सख्त शर्तें भी लागू की हैं। याचिकाकर्ता ग्वालियर निवासी डॉ. आकांक्षा तोमर ने याचिका दायर कर ग्रामीण सेवा बॉन्ड से छूट अथवा बॉन्ड राशि जमा करने के बाद एनओसी जारी करने की मांग की थी। तर्क… जांच अभी लंबित है
राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने कहा कि व्यापमं घोटाले की जांच अभी लंबित है और बॉन्ड समाप्त होने के बाद याचिकाकर्ता जांच एजेंसियों की निगरानी से बाहर जा सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा उपाय अपनाकर याचिकाकर्ता को ट्रेस किया जा सकता है।

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