भास्कर न्यूज | महासमुंद हिन्दी साहित्य के महाप्राण पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की जयंती व बसंत पंचमी पर साहित्य समिति आस्था के तत्वावधान में गोष्ठी-कविताओं में बसंत का आयोजन त्रिमूर्ति कालोनी स्थित जीवन सदन में किया गया। इस अवसर पर साहित्यकार सुरेन्द्र अग्निहोत्री ने सरस्वती वंदना को सुरीले स्वरों में पिरोया। समिति अध्यक्ष आनंद तिवारी पौराणिक ने निराला के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे जीवन भर अभावों और कष्टों से जूझते रहे पर उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी कविताओं में छायावाद, प्रकृति चित्रण, राष्ट्रप्रेम, आध्यात्म व दीनहीनों, श्रमिकों के प्रति अपार करुणा के स्वर दिखाई देते हैं। इस मौके पर मुख्यअतिथि दाऊ लाल चंद्राकर ने कहा कि निराला जी महामानव थे। उन्होंने हिन्दी कविता को रुढिय़ों से मुक्त किया। सरिता तिवारी ने पंक्तियां दी- टेसू के फूलों से धरा ने किया श्रृंगार, प्रियतमा का खत्म हुआ इन्तजार। व उत्तरा विदानी ने कहा मन मछा गे उमंग, रितुराज बसंत संग की प्रस्तुति दी। सुरेन्द्र अग्निहोत्री ने मधुमास का स्वागत आगे, आगे रे बसंत कहकर किया। डॉ. साधना कसार ने निर्झर के प्रवाह व पुरवाई के मधुर संगीत पर कहा झर झर निर्झर, बहने लगे, नव पल्लव चमकने लगे का सुंदर प्रस्तुतिकरण किया। इस मौके पर दाऊलाल चंद्राकर, केआर चंद्राकर, एस चन्द्रसेन सहि अन्य साहित्यकार मौजूद थे।


