CG-PSC भर्ती घोटाला…पूर्व-अध्यक्ष समेत तीन आरोपियों को जमानत नहीं:हाईकोर्ट बोला-लाखों अभ्यर्थियों की भावनाओं से जुड़ा मामला, आरोप गंभीर, लंबी हिरासत के आधार पर राहत से इनकार

CG-PSC भर्ती घोटाले पर हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने कहा है कि यह केस केवल आपराधिक मामला नहीं है। बल्कि, यह लाखों युवाओं की भावनाओं से जुड़ा है। उनके करियर और भविष्य के साथ खिलवाड़ है। घोटाले पर गंभीर आरोप है, जिसकी जांच जारी है। केवल लंबे समय से हिरासत में होने के आधार पर आरोपियों को जमानत देना उचित नहीं है। हाईकोर्ट ने प्रकरण में PSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और परीक्षा उप नियंत्रक ललित गनवीर समेत तीन आरोपियों की जमानत दूसरी बार खारिज कर दी है। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, इन अधिकारियों पर अपने रिश्तेदारों और रसूखदारों के करीबियों को लाभ पहुंचाने के लिए पेपर लीक करने और चयन प्रक्रिया में धांधली करने का गंभीर आरोप है। इस मामले की सीबीआई जांच भी चल रही है। सीबीआई ने बताया पद का दुरुपयोग
सीबीआई ने दलील दी कि साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षा में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच में सामने आया कि एक निजी कंपनी से सीएसआर मद के तहत 45 लाख रुपये एक एनजीओ को दिए गए, जिसकी अध्यक्ष सोनवानी की पत्नी थीं। इसके बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए। प्रश्न पत्र लीक करने में रही प्रमुख भूमिका
सीबीआई का यह भी आरोप है कि परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने अध्यक्ष के निर्देश पर उद्योगपति श्रवण गोयल को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए, जिन्होंने आगे यह प्रश्नपत्र अपने बेटे और बहू को दिए। दोनों का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। वहीं, सोनवानी के भतीजों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी पद पर हुआ। हाईकोर्ट ने कहा- जमानत देना न्यायोचित नहीं
आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि वे निर्दोष हैं, जांच लगभग पूरी हो चुकी है और सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उन्हें भी राहत दी जाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मनीष सिसोदिया बनाम प्रवर्तन निदेशालय फैसले का हवाला भी दिया। हालांकि, कोर्ट ने सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि दोनों आरोपी इस षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका निभाते प्रतीत होते हैं और मामले की आगे की जांच अभी शेष है। इसलिए वर्तमान चरण में जमानत देना न्यायोचित नहीं है। इस प्रकार, हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी है।

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