एमपी में बारिश-ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान:शिवपुरी, अशोकनगर, गुना में गेहूं- चने की फसल आढ़ी हुई, मुरैना में सरसों की फसल चौपट

मध्य प्रदेश के कई जिलों में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। बीते 24 घंटों के दौरान तेज बारिश और ओलावृष्टि से शिवपुरी, अशोकनगर, गुना और मुरैना जिलों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कहीं गेहूं और चना खेतों में आढ़ी गिर गई, तो कहीं सरसों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। मुरैना, अशोकनगर में चने के आकार के ओले गिरे। बेमौसम बारिश और ओलों से किसान गहरे संकट में आ गए हैं। शिवपुरी: चना सबसे ज्यादा प्रभावित शिवपुरी जिले में तेज बारिश और ओलावृष्टि से चना, गेहूं, सरसों, टमाटर और प्याज की फसल को भारी नुकसान हुआ है। शिवपुरी, कोलारस, करेरा और पिछोर विधानसभा क्षेत्रों में बारिश का व्यापक असर देखा गया। कई जगह चने के खेतों में पानी भर गया, जिससे फसल बिछ गई। सब्जियों की पत्तियां झड़ गईं। शिवपुरी विधानसभा के रामखेड़ी गांव के किसान दिनेश रावत ने बताया कि शाम को बारिश हुई और रात करीब 8 बजे ओलावृष्टि शुरू हो गई। चने की फसल पूरी तरह बिछ गई, टमाटर के पौधों की पत्तियां झड़ गईं और प्याज के खेतों में पानी भर गया। गेहूं और सरसों की फसल भी प्रभावित हुई है। करेरा क्षेत्र के करीब 50 गांवों में ओले गिरने से फसलें खराब हो गईं। रन्नौद तहसील के ग्राम मोहम्मदपुर में चने के बराबर आकार के ओले गिरे। गुना: एक इंच से ज्यादा बारिश गुना जिले में बीते 24 घंटे में एक इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। बारिश और ओलावृष्टि से धनिया, गेहूं और सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। फतेहगढ़, बमोरी और मावन क्षेत्रों में ओले गिरने से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। मावन क्षेत्र में गेहूं की फसल खेत में आढ़ी गिर गई, वहीं धनिया की फसल भी बिछ गई। अशोकनगर: चने के आकार के ओले गिरे अशोकनगर जिले में मंगलवार देर रात तक बारिश हुई। बहादुरपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। गीलारोपा, ओडेर, नानौटी, मल्हारगढ़ और नरखेड़ा सहित आधा दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित हुए हैं। नरखेड़ा और ओडेर गांव में करीब पांच मिनट तक बेर के आकार के ओले गिरे। खेतों और गलियों में सफेद परत जम गई, जो करीब आधे घंटे बाद घुली। गेहूं, चना, मसूर, सरसों और धनिया की फसलें बिछ गईं और कई जगह टूट भी गईं। मुरैना: सरसों की फसल पूरी तरह नष्ट मुरैना जिले में बारिश और ओलावृष्टि से सरसों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कई इलाकों में सरसों पूरी तरह चौपट हो गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। मुरैना में मंगलवार दोपहर से तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर रात तक जारी रहा। देर रात मुरैना के कई विकास खंडों कैलारस, पहाड़गढ़, जौरा में तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। आगर मालवा-गेहूं, चने की फसलें बर्बाद आगर मालवा जिले के कानड़-तनोड़िया सहित कई गांवों में बारिश के साथ नींबू आकार के ओले गिरे, जिससे रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ। ओलावृष्टि से गेहूं, चना, सरसों, धनिया व मसूर की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं, कई स्थानों पर फसलें आड़ी हो गईं। आखाखेड़ी गांव के किसान प्रभुलाल शर्मा ने फसल पूरी तरह खराब होने की बात कहते हुए सरकार से सहायता की मांग की है। एसडीएम मिलिंद ढोके के अनुसार करीब 50 गांवों में नुकसान की सूचना है, सर्वे के लिए दल गठित कर दिए गए हैं। शाजापुर ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को भारी नुकसान शाजापुर जिले में मंगलवार को हुई तेज ओलावृष्टि के बाद बुधवार सुबह से ही आसमान पर काले बादल छाए हुए हैं। ओलावृष्टि के कारण जिले के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं की फसल पूरी तरह आड़ी हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में और इतनी तेज ओलावृष्टि देखी है। तेज हवाओं के साथ गिरे बड़े-बड़े ओलों ने खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। कई किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है और अब उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा दिए जाने की मांग की है। मौसम विभाग ने आगे भी मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। सारंगपुर- चने की फसलों पर आड़ी और ओलावृष्टि का दोहरा मार वर्षा से क्षेत्र के दर्जनों गांवों में फसलों को भारी नुकसान हुआ। विशेषकर गेहूं की तैयार फसलें तेज हवाओं के कारण आड़ी पड़ गई, जिससे अब उत्पादन घटने की आशंका है। बुधवार सुबह मिली जानकारी के अनुसार, भीलखेड़ा, बाबल्दी, अमलारोड़, धामंदा, घटटिया, अरनिया, साबरसिया, हराना, भ्याना, भैंसवामाता, खजुरिया घाटा सहित कई गांवों में ओलावृष्टि हुई। किसानों की मांग लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से परेशान किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द फसल नुकसान का सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर राहत नहीं मिली तो उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है

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