श्रीशंकर शुक्ला/सुधीर सागर की रिपोर्ट रायपुर-विशाखापट्टनम के बीच इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण जारी है। अगले दो साल में यह पूरा हो जाएगा। 464 किमी लंबे इस सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे का करीब 70 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। यह सड़क छत्तीसगढ़ को ओडिशा और आंध्रप्रदेश से जोड़ेगी। इस कॉरिडोर की खासियत यह है कि एक्सप्रेस-वे में जंगली जानवरों के लिए अलग-अलग कैनोपी (ब्रिज) और रास्ते बनाए गए हैं। इसमें 28 मंकी कैनोपी शामिल है, क्योंकि सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व में बंदरों की संख्या अधिक है। इसी तरह हाथियों के आने जाने के लिए 8 ओवरब्रिज का निर्माण हो रहा है। क्योंकि धमतरी हाथियों का कॉरिडोर है। इसके साथ ही बाघ-भालू जैसे जानवरों के आने-जाने के लिए 19 एनिमल पास-वे रूट बनाए जा रहे हैं। तीन फेस में चल रहे काम को ऐसे समझें पहला फेस
42 किमी, झांकी से सरगी तक (40 किमी का काम पूरा हुआ) दूसरा फेस
57 किमी, सरगी से वसनवाही तक (40 किमी तक काम पूरा) तीसरा फेस
25 किमी, वसनवाही से मरांगपुरी (10 किमी काम पूरा) कॉरिडोर की खासियत कॉरिडोर बनने के ये फायदे होंगे रायपुर से विशाखापट्टनम जाने में लगेंगे सात घंटे रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर में टनल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही मंकी कैनोपी के साथ ही हाथियों के आने जाने के लिए रास्ते बनाए जा रहे हैं। कॉरिडोर के शुरू होने से रायपुर से विशाखापट्टनम की दूरी 7 घंटे में पूरी हो सकेगी। -प्रदीप कुमार लाल, रीजनल आफिसर, छत्तीसगढ़


