भास्कर न्यूज | बालोद स्वास्थ्य विभाग की वार्षिक रिपोर्ट ने पीएचई के दावों की पोल खोल दी है। पीएचई का दावा है कि जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में साफ पानी की सप्लाई हो रही है। जबकि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से दिसंबर 2025 तक गंदा पानी पीने की वजह से जिले के 1 हजार 109 लोग डायरिया की चपेट में आए है। जबकि पीलिया के 15 मरीज मिले है। दिलचस्प है कि एक ओर स्वास्थ्य विभाग डायरिया, पीलिया बीमारी फैलने की वजह गंदा पानी को बता रही है। वहीं एनएबीएल लैब में सैंपल जांच के आधार पर पीएचई पानी को पीने लायक बता रही। ऐसा सिलसिला सालभर चलता रहता है। एक ओर पीलिया, डायरिया फैलने की वजह स्वास्थ्य विभाग हर बार गंदा पानी को बताती है। वहीं लैब में सैंपल जांच के बाद पीएचई उसी पानी को पीने लायक बताती है। सीएमएचओ डॉ. जेएल उइके का कहना है कि डायरिया, पीलिया व अन्य जलजनित बीमारियां फैलने की मुख्य वजह गंदा पानी है। इसके अलावा खान-पान की वजह से लोग बीमार हो जाते हैं। पीएचई के ईई सागर वर्मा मौन है। वहीं लैब में पदस्थ केमिस्ट वंदना जैन के अनुसार डायरिया प्रभावित तरौद को छोड़ लगभग सभी जगह का पानी पीने लायक है। तरौद के पानी में बैक्टीरिया निकला था। दोनों विभाग में सामंजस्य नहीं, वजह भी पता नहीं जलजनित बीमारियों की चपेट में लोग आते रहते है लेकिन ऐसी स्थिति क्यों बनी? यह मालूम नहीं हो पाता क्योंकि दोनों विभाग में सामंजस्य नहीं है। लिहाजा बीमारी फैलने की मुख्य वजह का पता जिम्मेदार नहीं लगा पाते। अमूमन पीलिया, डायरिया फैलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंचती है और हर बार गंदा पानी सप्लाई को मुख्य वजह बताती है। जबकि लैब में सैंपल जांच के बाद पीएचई उसी को पीने लायक बताती है। सीएमएचओ डॉ. जेएल उइके का कहना है कि गंदा पानी के अलावा दूषित भोजन या खाद्य सामग्री खाने से भी लोग बीमार हो जाते है। साफ-सफाई पर ध्यान नहीं देते। गंदे हाथ से खा लेते है। पीएचई को ही पानी सैंपल लेकर जांच का जिम्मा किसी भी गांव में डायरिया फैलने पर सैंपल जांच के लिए औपचारिकता निभाई जाती है क्योंकि पीएचई को ही पानी सप्लाई के अलावा सैंपल कलेक्ट कर जांच की जिम्मेदारी दी जाती है। पीएचई के अनुसार जिले में कहीं भी डायरिया, पीलिया की चपेट में आने से लोग बीमार होते है, तब इसकी जानकारी मिलती है तो सैंपल लेकर लैब में पानी की जांच कई पैरामीटर्स पर करते है। एनएबीएल लैब में 12 से 17 पैरामीटर्स पर जांच होती है। सभी पैरामीटर्स पर खरा उतरने पर माना जाता है कि पानी पीने लायक है। लैब मंे पानी जांच के लिए कई पैरामीटर्स तय होते है। पानी के बजाय दूसरे कारण से ग्रामीण डायरिया, पीलिया से संक्रमित हुए होंगे। केस 1- ग्राम खुर्सीपार (गोड़ेला) में 10 से ज्यादा लोगों को पीलिया हुआ था। स्वास्थ्य विभाग ने गंदा पानी पीने की वजह से बीमारी फैलने का दावा किया था। लेकिन यहां 14 स्थानों से लिए गए पानी सैंपल की गुंडरदेही व बालोद एनएबीएल लैब में 17 पैरामीटर्स पर जांच के बाद पीएचई ने रिपोर्ट जारी कर पानी को पीने लायक बताया। केस 2- फागुन्दाह गांव में 30 से ज्यादा लोग डायरिया की चपेट में आने पर वॉल्व लिकेज से गंदा पानी की सप्लाई को स्वास्थ्य विभाग ने कारण बताया। जबकि लैब में जांच के बाद पीएचई ने पानी को पीने लायक बताया। केस 3- पैरी गांव में 100 से ज्यादा लोग डायरिया की चपेट में आए थे। तब स्वास्थ्य विभाग ने गंदा पानी को वजह बताया लेकिन पीएचई ने जांच के आधार पर पानी को पीने लायक बताया। केस 4- सिकोसा गांव में 60 से ज्यादा लोग डायरिया की चपेट में आए थे। स्वास्थ्य विभाग ने गंदा पानी को वजह बताया। पीएचई ने सैंपल जांच के बाद पानी को पीने लायक बताया।


