लुधियाना| हाल ही में कंबोडिया में चल रहे इंटरनेशनल साइबर–फाइनेंशियल सिंडिकेट की जड़ें राजस्थान से लेकर पंजाब तक मिली हैं। पूरे नेटवर्क को फर्जी सिम, बैंक खाते और तकनीकी सपोर्ट की सप्लाई लुधियाना से होने के इनपुट जांच एजेंसियों को मिले हैं। मामले में जोधपुर क मिश्नरेट पुलिस की तकनीकी जांच में करीब 2.30 लाख भारतीय सिम कार्ड का डेटा खंगाला गया। इनमें से 36 हजार सिम कार्ड कंबोडिया में सक्रिय मिले। 5,300 से ज्यादा सिम ऐसे थे जिनसे वॉट्सएप से ठगी वाले कॉल किए जा रहे थे। ये सभी सिम 1000 से 1500 रुपए प्रति सिम के हिसाब से बेचे गए। जिससे करीब 1100 करोड़ रुपए का खेल खेला गया। 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन सिमको के जरिये फ्रॉड किए जा रहे थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक राजस्थान पुलिस ने लुधियाना के संदीप भट्ट को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि लुधियाना और अनूपगढ़ (राजस्थान) में बड़ी संख्या में सिम कार्ड एक्टिव कर कंबोडिया भेजे गए। वहां चाइनीज गिरोहों द्वारा चलाए जा रहे कॉल सेंटरों में इन सिम का इस्तेमाल होता था। जांच एजेंसियां लुधियाना के पुराने ऑनलाइन ट्रेडिंग, फॉरेक्स और बेटिंग फ्रॉड के मामले खंगाल रही हैं, फर्जी कॉल सेंटर, ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और अवैध बेटिंग रैकेट इसी मॉडल पर काम कर रहे थे। साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी सिम लेते समय बायोमेट्रिक के बाद स्क्रीन पर दिख रहा नंबर जरूर चेक करें। {आधार की कॉपी हर जगह न दें, मास्क्ड आधार या वोटर आईडी बेहतर है ।{लालच में बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड या ओटीपी किसी को न दें। { केवाईसी अपडेट के नाम पर आए लिंक पर क्लिक न करें। {संदिग्ध कॉल या मैसेज की शिकायत 1930 पर करें। यूं बनाते थे घोस्ट सिम रिटेल दुकानों पर सिम लेने पहुंचे ग्राहकों से बायोमेट्रिक दो बार लिया जाता था। एक सिम ग्राहक को व दूसरा सिम उसी की पहचान पर गुपचुप एक्टिव कर लिया जाता। ऐसे हजारों “घोस्ट सिम” बाद में देश से बाहर भेजे गए। क्या होते हैं म्यूल सिम कार्ड म्यूल सिम कार्ड वे मोबाइल सिम होते हैं जो किसी गरीब, अनजान या लालच में फंसाए गए व्यक्ति की आईडी पर जारी कराए जाते हैं। असली उपयोगकर्ता अपराधी होते हैं, जो इन सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी, फर्जी कॉल, डिजिटल


