जीवन जीने की कला सिखाती है भागवत कथा: सदानंद

भास्कर न्यूज | प्रतापपुर बुधवार को प्रतापपुर नगर पूरी तरह से धर्म, श्रद्धा और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। स्थानीय स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रथम दिवस पर नगर में कलश यात्रा निकाली गई। सुबह से ही पूरा वातावरण हरि नाम संकीर्तन, शंखनाद और ढोल-नगाड़ों की थाप से गूंज उठा। कलश यात्रा की शुरुआत स्थानीय पक्की तालाब से हुई, जहां से महिलाओं ने विधि-विधान से पवित्र जल भरकर सिर पर कलश धारण किया। युवाओं की टोलियां हाथों में भगवा ध्वज लेकर जयघोष करती हुई चल रही थीं। गाजियाबाद से आई विशेष ढोल-नगाड़ों की टोली, आकर्षक झांकियों और आतिशबाजी ने इस यात्रा को शोभायात्रा का स्वरूप दे दिया। यात्रा राजघराना चौक, कदमपारा चौक, कॉलेज चौक, बस स्टैंड और थाना चौक होते हुए कथा पंडाल (स्टेडियम ग्राउंड) पहुंची। पूरे मार्ग में नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। आयोजन के मुख्य यजमान छोटेलाल जायसवाल व कौशल्या जायसवाल रहे। उन्होंने श्रीमद् भागवत ग्रंथ का विधिवत पूजन किया और उसे श्रद्धापूर्वक सिर पर धारण कर नगर भ्रमण किया। आचार्य सदानंद वृंदावन (मथुरा) से पधारे कथा प्रवक्ता आचार्य सदानंद महाराज ने प्रथम दिवस श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने शुकदेव-परिक्षित संवाद के माध्यम से कथा श्रवण के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह मनुष्य को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के मार्ग पर अग्रसर कर मानसिक शांति प्रदान करती है। प्रतापपुर में हाल ही में हुए त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है। आगामी दिनों में भक्त ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र, राम-कृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन पूजा, महारास और सुदामा चरित्र जैसे प्रसंगों का रसपान करेंगे। कथा का समापन विशाल भंडारे और हवन-पूर्णाहुति के साथ होगा।

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