जालंधर| हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को जया एकादशी का व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में प्रत्येक एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। माघ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। यह दिन श्रीहरि की पूजा-भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सभी व्रतों में एकादशी का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस वर्ष जया एकादशी 29 जनवरी को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मान्यता यह भी है कि जया एकादशी की रात्रि में जागरण करने से व्यक्ति को जीवन के अंत में बैकुंठ की प्राप्ति होती है। माघ महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी प्रकार के दोष और पाप नष्ट हो जाते हैं। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि जया एकादशी के अवसर पर व्रत, दान और भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत रखने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने बताया कि एकादशी तिथि 28 जनवरी को शाम 4 बजकर 37 मिनट से प्रारंभ होकर 29 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। 29 जनवरी को वीरवार होने और सूर्योदय के साथ तिथि पड़ने के कारण इसी दिन जया एकादशी मान्य रहेगी। माघ माह के स्वामी भगवान विष्णु हैं और एकादशी तिथि भी विष्णु जी को समर्पित होने के कारण इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन व्रत और पूजा के साथ जरूरतमंदों को तिल, गर्म कपड़े और अन्न का दान करने से कई यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है। जया एकादशी के दिन ये कार्य बिल्कुल भी न करें- .तुलसी के पत्ते न तोड़ें। .इस दिन दाढ़ी बनाना तथा नाखून और बाल कटवाना वर्जित माना गया है। .व्रत के दौरान पालक, चावल, पान, गाजर, बैंगन, गोभी और जौ का सेवन न करें। .इस दिन दान में प्राप्त अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए।


