कैंसर को हरा चुके लोगों ने अपना संघर्ष बयां कर बढ़ाया मरीजों का हौसला

भास्कर न्यूज | अमृतसर मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में मंगलवार को विश्व कैंसर दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कैंसर को मात दे चुके 15 लोगों ने कैंसर के अंधेरे से उजाले तक का अपना सफर और संघर्ष बयां कर मरीजों को कमजोर न पड़ने का संदेश दिया। इन लोगों का कहना था कि जब कैंसर होने का पता चला तो उन्हें लगा कि वे नहीं बचेंगे, मगर जीएनडीएच में पहुंचने के बाद जैसे-जैसे इलाज आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे उनका डर खत्म होता गया। डॉक्टरों ने भी उन्हें कभी मानसिक रूप से कमजोर नहीं होने दिया। इसी कारण वे कैंसर को मात दे पाए। इन लोगों ने ‘यूनाइटेड बाय यूनिक डिजीज, यूनाइटेड बाय सरवाइवल’ का संदेश दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी राहुल कुमार ने कहा कि कैंसर को अब हराना नामुमकिन नहीं है। जीएनडीएच में कैंसर के इलाज की सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां देश के किसी भी हिस्से के व्यक्ति को मुफ्त रेडिएशन थेरेपी दी जाती है, जबकि प्राइवेट में रेडिएशन के लिए दो से ढाई लाख रुपए मरीजों को खर्च करने पड़ते हैं। पंजाब के बोनाफाइड मरीज को यहां कीमोथेरेपी भी मुफ्त करवाई जाती है। यह सब मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत सरकार की ओर से चलाई जा रही इलाज स्कीम के तहत संभव हो रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. राजीव देवगन ने कहा कि इस वर्ष ‘विश्व कैंसर दिवस’ का थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनिक’ है। इसका उद्देश्य कैंसर जैसी यूनिक बीमारी के मरीजों और कैंसर को मात दे चुके सरवाइवर को एक मंच पर लाना है, ताकि सरवाइवर कैंसर को हराने के अपने अनुभव मरीजों से साझा करें और मरीज उनका लाभ उठा पाएं। क्योंकि हर मरीज का अपना अनुभव होता है। कैंसर के मरीज के लिए हिम्मत बनाए रखना सबसे जरूरी होता है। अगर मरीज हिम्मत हार जाए तो डॉक्टर के लिए उसका इलाज करना और भी कठिन हो जाता है। नर्सिंग कॉलेज के स्टूडेंट्स ने भी कार्यक्रम के दौरान कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक किया। इस आयोजन में कैंसर सर्जरी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. बिक्रमजीत सिंह, कैंसर से रिकवर हुए मरीजों को मुफ्त दवाएं देने वाली संस्था सेवा सदन एनजीओ के भोलेनाथ खन्ना, रमेश महाजन और बटाला के कांग्रेसी नेता कस्तूरी लाल भी मौजूद थे। अपने विचार रखते डायरेक्टर प्रिं. डा. राजीव देबगन।

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