धरती आबा जनजाति उन्नत ग्राम अभियान के तहत विकसित जनजाति ग्राम का पूरा प्लान खुद ग्राम सभा में तैयार होगा। इसके लिए गांवों में अलग से विशेष ग्राम सभाएं बुलाई जाएंगी। लोकसभा में गुरुवार को सांसद डॉ. रावत ने तारांकित प्रश्न के जरिए यह सुझाव रखा था। इस पर जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने सहमति जताते हुए कहा -सरकार इस पर काम करेगी। राजस्थान में भी 30 जिलों के 208 ब्लॉकों में आने वाले 6019 गांवों में यह अभियान चलाया जा रहा है। इसका मुख्य मकसद गांवों में सुविधाओं और मानव संसाधन विकास के लक्ष्यों को 100 प्रतिशत पूरा करना है। इस अभियान में देशभर के 63 हजार से ज्यादा जनजाति बहुल गांवों को शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2024 को ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (DAJGUA) की शुरुआत की थी। इस अभियान में सरकार के 17 मंत्रालय मिलकर 25 तरह के सुधार कार्य करेंगे। इसका लक्ष्य आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और विकास की कमियों को दूर करना है। इस बड़े अभियान के जरिए जनजातीय समुदायों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, साफ पानी, पक्के मकान और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे। सरकार का जोर इस बात पर है कि सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे इन गांवों तक पहुंचे और वहां कनेक्टिविटी व कौशल विकास को मजबूती मिले। देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों में फैले 63,843 गांवों को इस योजना में कवर किया गया है। अगले पांच सालों के लिए इस अभियान का कुल बजट 79,156 करोड़ रुपये रखा गया है। इसमें केंद्र सरकार 56,333 करोड़ और राज्य सरकारें 22,823 करोड़ रुपये खर्च करेंगी। राजस्थान में उदयपुर, सलूंबर, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों में राज्य सरकार के प्रस्तावों के आधार पर कई काम मंजूर किए गए हैं। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, इन चार जिलों के 2038 गांवों में से 1850 गांवों में पीने के पानी की सप्लाई का काम पूरा हो चुका है। आवास के मामले में भी बड़ी राहत मिली है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने डूंगरपुर में 6076, प्रतापगढ़ में 2793, सलूंबर में 9092 और उदयपुर जिले में 2218 पक्के मकानों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही दूरसंचार विभाग ने डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर के सैकड़ों गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचा दी है।


