अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को जमीन देने पर बीएसएल सहमत

भास्कर एक्सक्लू​िसव वर्ष 2026 में राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद है। बोकारो में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (एकेआईसी) परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में झारखंड सरकार ने ठोस कदम तेज कर दिए हैं। बोकारो में प्रस्तावित एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (आईएमसी) के लिए बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) की 746 एकड़ भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। भूमि हस्तांतरण की दर तय करने को लेकर 23 दिसंबर 2025 को गठित समिति की रिपोर्ट पर बीएसएल तथ्यात्मक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। राज्य सरकार द्वारा उद्योग विभाग के स्तर पर गठित समिति के निर्देशानुसार भूमि का पुनर्मूल्यांकन कराया गया है। सरकार की पहल पर जुलाई 2025 में सेल के अधिकृत पैनल वैल्यूअर आरके पटेल एंड कंपनी से मूल्यांकन कराया गया, ताकि दर पूरी तरह जीएफआर नियम 2017 के अनुरूप और पारदर्शी हो। बीएसएल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच भूमि हस्तांतरण के मामलों में सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) नियमों का अनुपालन अनिवार्य है, जिसे लेकर सभी बैठकों में सहमति बनी थी। रेलवे को दी गई 7 एकड़ जमीन के रेट को आधार बनाया बीएसएल ने बीएसएल ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में 7.22 एकड़ भूमि को दक्षिण-पूर्व रेलवे को रेलवे लाइन विस्तार परियोजना के लिए फेयर मार्केट वैल्यू पर हस्तांतरित किया गया है, जहां 3.10 लाख रुपए प्रति डिसमिल की दर से कुल 22.38 करोड़ रुपए रेलवे ने दिया है। इन सभी तथ्यों के आधार पर यह प्रस्ताव रखा गया है कि सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर) नियम 2017 के तहत मौजा-भतुआ की लगभग 746 एकड़ भूमि को 1353.56 करोड़ रुपए के बाजार मूल्य पर राज्य सरकार को हस्तांतरित किया जाए। इसमें केवल रैयती भूमि का मूल्य शामिल है, जबकि गैर मजरुआ एवं वन भूमि निःशुल्क हस्तांतरित होगी। माना जा रहा है कि भूमि हस्तांतरण का यह निर्णय एकेआईसी परियोजना को धरातल पर उतारने में मील का पत्थर साबित होगा। गैरमजरूआ भूमि सरकार को वापस मिलेगी प्रस्ताव के अनुसार भतुआ मौजा में कुल 746.2144 एकड़ भूमि परियोजना के लिए चिह्नित की गई है। इसमें से 165.288 एकड़ गैर मजरुआ और वन भूमि है, जिसे राज्य सरकार ने पूर्व में बीएसएल को निःशुल्क दिया था। राज्य सरकार की औद्योगिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए यह भूमि अब एकेआईसी प्रोजेक्ट के लिए पूरी तरह निःशुल्क राज्य सरकार को वापस हस्तांतरित की जाएगी। शेष 580.9264 एकड़ रैयती भूमि का हस्तांतरण वर्तमान बाजार दर पर किया जाएगा। पुनर्मूल्यांकन के दौरान 596.9715 एकड़ भूमि को मूल्यांकन में शामिल किया गया, जबकि 149.2429 एकड़ भूमि सड़क व अन्य आधारभूत संरचना विकास के लिए छोड़ी गई। इस मूल्यांकन में रैयती भूमि का कुल बाजार मूल्य 1391.24 करोड़ रुपए आंका गया है। समिति रिपोर्ट में दरों को लेकर उठाई गई शंकाओं पर बीएसएल ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि 2.33 लाख रुपए प्रति डिसमिल भूमि की औसत दर है, जबकि 3.16 लाख रुपए प्रति डिसमिल केवल बेस रेट है, जिसके आधार पर नियमों के अनुसार विभिन्न बेल्ट की दरें तय की जाती हैं।

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