भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री दुर्ग्याणा तीर्थ में वीरवार को जया एकादशी मनाई गई। तीर्थ के मुख्य श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में पुजारी ओम प्रकाश ने अन्य पंडितों के साथ मिलकर मंत्रोच्चारण किया। इसी दौरान मंदिर के श्री लक्ष्मी नारायण, राम परिवार और राधा कृष्ण जी दरबार के सभी विग्रहों का दुग्ध स्नान कराया। पंडित ओम प्रकाश ने सभी विग्रहों का सुंदर शृंगार करवा कर फलों के भोग लगाए। इसी दौरान भक्तों को प्रभु चरणों का अमृत पिलाया गया। मंदिर के मुखिया ने कहा कि जया एकादशी के दिन व्रत रखने से हर प्रकार का सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है और रुके कार्य बनने लगते हैं। जया एकादशी का व्रत करने से श्रीहरि की कृपा भी मिलती है, लेकिन व्रत तब तक अधूरा ही माना जाता है, जब तक इससे संबंधित व्रत कथा का पाठ न किया जाएगा। इसी दौरान पंडितों ने राजा इंद्र और गंधर्व से जुड़ी एकादशी की कथा बताई। कथा के अनुसार एक बार इंद्र की सभा में अप्सराएं नृत्य कर रहीं थी। सभा में गंधर्व पुष्पवंत, उसकी लड़की पुष्पवती और चित्रसेन की स्त्री मालिनी और उसका पुत्र माल्यवान भी मौजूद थे। उस समय पुष्पवती माल्यवान को देख मोहित हो गई और उसके मन में काम भाव जाग उठा। पुष्पवती ने अपने रूप, सौंदर्य, हाव-भाव से माल्यवान को कामासक्त कर दिया। तब राजा इंद्र ने उन्हें अलग करने के लिए नृत्य करने का आदेश दिया। दोनों नृत्य करने लगे लेकिन कामातुर होने के कारण वे सही से नृत्य नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद देवराज इंद्र गंधर्व माल्यवान और पुष्पवती से नाराज हो गए और दोनों को पिशाच बनने का श्राप दिया।


