व्यक्ति को अपने संकल्प मजबूत रखने चाहिए। जो व्यक्ति अपने संकल्पों को निभाते हैं उनको सफलता अवश्य प्राप्त होती है। यह बात उग्र विहारी व तपोमूर्ति मुनि कमल मुनि ने बुधवार दोपहर में मोना इंडस्ट्रीज में प्रवचन देते हुए कहीं। उन्होंने नशामुक्त जीवन जीने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सद्गुणी व्यक्ति की प्रशंसा हर जगह व हमेशा होती है। उन्होंने फैक्ट्री के लोगों को नशामुक्त रहने व पान पराग, गुटका तथा जर्दा नहीं खाने के त्याग करवाएं। मुनि ने कहा कि जैन धर्म में तीन कारण व तीन योग से त्याग करने की बात पर बल दिया गया है। उन्होंने पच्चीस बोलों की चर्चा करते हुए बताया कि कल्याणकारी कार्यों में जुड़े रहें ताकि मृत्यु के बाद उच्च गति में जा सके। मुनि कमल कुमार ने कहा कि मोक्ष मनुष्य जीवन से ही प्राप्त होता है। देवता भी मनुष्य जीवन के लिए तरसतें है। श्रम व पुरुषार्थ से भाग्य का निर्माण होता है। पुरुषार्थ असंभव को संभव बना देता है। पुरुषार्थ असंभव शब्द को शब्दकोष से हटा देता है। उन्होंने कहा कि सर्दी, गर्मी और वर्षा भी साधु के विहार को नहीं रोक सकते हैं। साधु के लिए विहार में एक रात से ज्यादा रहने का प्रावधान नहीं है। मुनि कमल कुमार ने साधु के समक्ष पद, धन का नहीं सेवा का महत्व होता है। पद के लिए प्रयास न करें, महत्वाकांक्षी न बने। उन्होंने कहा संयम से प्रगति और असंयम से दुर्गति होती है। महावीर की वाणी व्यक्तियों को जागृत कराती है। जीवन को नैतिक बनाने के लिए ह्रदय में अणुव्रत होना चाहिए। सभी के प्रति कल्याण की भावना रखनी चाहिए। मुनि ने कहा कि “ जिंदगी इंसानियत से जिनी चाहिए, वक्त आये तो गर्दन कटानी चाहिए। मुनि ने कहा कि मोक्ष का मार्ग ज्ञान, दर्शन और चारित्र से है। जीवन में नम्रता रखनी चाहिए, नम्रता जैन धर्म का मूल है, सभी समस्याओं का इससे समाधान हो जाता है। सभी का आभार जेठमल, मनीष व पवन छाजेड़ तथा बच्छराज भूरा ने किया।


