भास्कर न्यूज | मंडावरी (लालसोट) उपखंड के मंडावरी कस्बे की अनाज मंडी तीन दिनों से बंद पड़ी हुई है जिसके चलते करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ वहीं दूसरी तरफ सरकार को भी लाखों रुपए के राजस्व से हाथ धोना पड़ा है। मंडी सचिव ममता गुप्ता की मध्यस्थता के बाद बुधवार को मजदूर संघ के पल्लेदार नेताओं तथा व्यापार मंडल के व्यापारियों के बीच में समझौता वार्ता हुई मगर कुछ बिंदुओं पर सहमति नहीं बनने के कारण समझौता वार्ता विफल हो गई। एक तरफ जहां व्यापार मंडल के पदाधिकारी जितना काम उतना दाम की दलील देकर बगैर किए हुए काम का दाम देने से इनकार कर दिया। वहीं दूसरी तरफ मजदूर संघ के नेता पहले से चली जा रही परंपरा की दलील देकर मजदूरी की मांग पर अड़े रहे। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता विफल हो गई। व्यापार मंडल के अध्यक्ष रामजीलाल गांधी,लोकेश शर्मा सहित नेताओं ने कहा कि लालसोट मंडी में लागू नियमों के आधार पर ही मंडावरी मंडी में मजदूरी की दरों को तय किया जाए तथा जितना दाम उतना काम की पद्धति को लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि बगैर किए हुए काम की मजदूरी देने से किसान पर बोझ बढ़ेगा तथा किसान को नुकसान होगा। उन्होंनें बताया कि लगभग 3 से 5 करोड़ रुपए रोज का कारोबार मंडावरी मंडी में होता है। जिससे लाखों रुपए का राजस्व राज्य सरकार को मिलता है। मंडी बंद होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। इधर मजदूर संघ के नेता ललित मोहन ने बताया कि दरों की बढ़ोतरी पर सहमति हो गई है लेकिन अभी भी कई मुद्दे ऐसे हैं जिनके ऊपर सहमति नहीं बन पाई है। वार्ता दोबारा होगी तब उन मुद्दों पर बात करेंगे। इसलिए गतिरोध बना हुआ है। मंडी सचिव ममता गुप्ता ने बताया कि दो दौर की वार्ता की गई। लेकिन आपसी मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता विफल हो गई। फिर से व्यापारी तथा मजदूरों के बीच समझौता वार्ता कराई जाएगी। जल्दी समझौते के प्रयास किए जाएंगे।


