चाईबासा के झींकपानी में एसीसी कंपनी की लीज से प्रभावित रैयतों और कृषक पाठशाला की जमीन के मालिकों ने एक अहम बैठक की। इस दौरान जमीन मालिकों ने रोजगार न मिलने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और आंदोलन की चेतावनी दी। जमीन मालिकों ने बताया कि उनकी भूमि पर एसीसी (अडानी सीमेंट) द्वारा कृषक पाठशाला संचालित की जा रही है। इसके बावजूद स्थानीय रैयतों को पर्याप्त रोजगार नहीं मिल रहा है। रोजगार के अभाव में कई परिवार आजीविका के लिए पलायन करने को मजबूर हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक संकट बढ़ रहा है। रैयतों ने आरोप लगाया कि पहले कृषक पाठशाला में स्थानीय लोगों को काम मिलता था। हालांकि, वर्तमान में वहां कार्यरत व्यक्ति मजदूरों को डरा-धमका रहा है। मजदूरों के अनुसार, उन्हें जेल भेजने की धमकी दी जाती है और यह दावा किया जाता है कि उस व्यक्ति की पहुंच उच्च प्रशासनिक अधिकारियों तक है, जिससे मजदूरों में भय का माहौल है। मजदूर नेता और केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मिरन मुंडा ने बैठक में कहा कि झारखंड राज्य के गठन के इतने वर्षों बाद भी यदि जमीन देने वाले आदिवासी परिवारों को रोजगार नहीं मिल रहा है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि पलायन भविष्य की पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रहा है और जमीन के बदले रोजगार प्राप्त करना रैयतों का अधिकार है। उन्होंने संगठित आंदोलन को ही एकमात्र समाधान बताया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि झींकपानी स्थित कृषक पाठशाला और एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी में स्थानीय जमीन मालिकों को रोजगार नहीं दिया गया, तो धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर जमीन वापसी की मांग भी उठाई जाएगी। इस बैठक में पूर्व मुखिया लादूरा मुंडा, प्रधान मुंडा, सत्या मंडर, अर्जुन मुंडा, राउतु मुंडा सहित बड़ी संख्या में जमीन मालिक और ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया।


