शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में तेजी से कम हो रही लो-फ्लोर बसों का मुद्दा बुधवार को विधानसभा में उठा। मालवीय नगर विधायक कालीचरण सर्राफ ने सरकार से पूछा कि शहरी मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 2400 बसें होना जरूरी हैं, लेकिन 200 का ही संचालन हो रहा है। इनमें से 100 बसें सितंबर 2025 में कबाड़ हो जाएंगी और 100 ही रह जाएंगी। सरकार पिछले पांच साल से बसें खरीदने की प्रक्रिया को विचाराधीन बता रही है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बसें कब तक आएंगी? यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि राजधानी में 40 लाख से अधिक लोग रहते हैं। ऐसे में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए 2400 बसों की जरूरत है। अभी 27 मार्गों पर 200 बसें चल रही हैं। इनके अलावा 43 मार्गों पर लोक परिवहन के लिए 2424 मिनी बस, 41 हजार 913 ऑटो और 45 हजार 508 ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। निजी बसों के भरोसे जिम्मेदार; सदन में सवाल सही, जवाब गोलमोल, सड़क पर जाम से परेशान जनता मंत्री बोले- 150 इलेक्ट्रिक-300 सीएनजी बसों के टेंडर हो गए खर्रा ने कहा कि भारत सरकार की योजना के तहत 150 इलेक्ट्रिक बसें का टेंडर हो चुका है। जेसीटीएसएल ने भी 300 सीएनजी बसें खरीदने के लिए टेंडर किया है। निविदा 6 फरवरी को निकलेगी। प्राइवेट कंपनियों से भी बस संचालन के लिए बात कर रहे हैं। कंडक्टर और राजस्व सरकार का होगा। ऑपरेटर को वायबिलिटी गैप का भुगतान किया जाएगा। भास्कर की खबर पर उठा मुद्दा; भास्कर ने 7 दिसंबर को 5 साल में सीएनजी इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के 3 बार प्रस्ताव बने, न कांग्रेस सरकार ने मंजूरी दी, ना भाजपा ने… नतीजा- 9 माह बाद 500 की जगह 100 रह जाएंगी… शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।


