कोटपूतली के कल्याणपुरा कुहाड़ा स्थित श्री छांपाला वाला भैंरूजी मंदिर का 17वां वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर विशाल मेला, भण्डारा और जागरण का आयोजन किया गया। लाखों श्रद्धालुओं ने भैंरू बाबा की प्रसादी ग्रहण की, जिसके लिए 651 क्विंटल चूरमा तैयार किया गया था। एक महीने पहले शुरू हुई थी चूरमा बनाने की तैयारी भैंरूजी के विशाल भण्डारे के लिए इतनी बड़ी मात्रा में चूरमा बनाने की तैयारी एक महीने पहले शुरू हो जाती है। चूरमा करीब सात दिन पहले बनना शुरू होता है। इसे बनाने के लिए जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और थ्रेशर जैसी मशीनें उपयोग में लाई जाती हैं। यह मेला अब प्रदेश में इस खास अंदाज में बनने वाले चूरमे के कारण ही जाना जाता है। पिछली बार 55 हजार किलो चूरमा बना था मेले में आसपास के ग्रामीण अपने स्तर पर व्यवस्थाएं संभालते हैं। मान्यता है कि यहां भैंरूजी को विशेष प्रसादी के रूप में चूरमे का भोग लगाया जाता है। पिछली बार 551 क्विंटल प्रसाद बनाया गया था, जबकि इस बार 651 क्विंटल चूरमे का भोग लगाया गया। धमाल कार्यक्रम का आयोजन वार्षिकोत्सव के मौके पर मुकेश एंड पार्टी (जमालपुर), शिंभु एंड पार्टी (मूसनौता), बीरबल एंड पार्टी (देवीपुरा), मक्खन महासी एंड पार्टी (बन की ढाणी), मुखराम (बगड़ावत एंड पार्टी मूसनौता), ख्यालीराम, श्योराम, जगदीश मण्ढ़ा और आंतेला डप, मंजीरा द्वारा धमाल कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। ओम बिरला भी भैंरू बाबा मंदिर में पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी कोटपूतली तहसील के ग्राम कल्याणपुरा कलां के कुहाड़ा स्थित भैंरू बाबा मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने श्री छांपाला वाला भैंरूजी के 17वें वार्षिकोत्सव पर आयोजित विशाल मेले, भण्डारे, जागरण और सामाजिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर विशाल जनसभा को संबोधित किया।
ये खबर भी पढ़ें: जेसीबी से बनाया 65 हजार किलो चूरमा:थ्रेसर से पीसा, ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर ले गए; 3 लाख श्रद्धालु लेंगे प्रसादी ऊपर दिख रही फोटो में ये न तो बजरी है और न ही रेत का ढेर। यह चूरमा है, जिसे मंदिर में प्रसादी के लिए बनाया गया है। करीब तीन लाख लोगों के लिए 651 क्विंटल से ज्यादा सामग्री से प्रसादी तैयार की जा रही है। यह प्रसादी 30 जनवरी (शुक्रवार) को कोटपूतली-बहरोड़ के कुहाड़ा गांव के छपाला भैरूजी मंदिर में लगने वाले लक्खी मेले में वितरित की जाएगी। खास बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में चूरमा बनाने के लिए थ्रेसर, जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉलियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। (पूरी खबर पढ़ें)


