समीक्षा बैठक:मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और सिविल सर्जन को अफसरों ने दी चेतावनी

राज्य के 20 जिले राष्ट्रीय कार्यक्रमों को लागू करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं। इन जिलों में न तो टीबी के मरीजों की जांच टारगेट के अनुसार की जा रही है न मलेरिया पीड़ितों की जांच व इलाज किया जा रहा है। कुष्ठ रोग और मोतियाबिंद के मरीजों की जांच व ऑपरेशन के भी लक्ष्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं। हैरानी की बात है कि रायपुर जिला भी रेड जोन में है। यहां भी राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत स्टाफ फील्ड में जाकर मरीजों की जांच और इलाज उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। इन जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, सीएमओ व सिविल सर्जन को अलर्ट करते हुए तुरंत काम में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। पड़ताल में पता चला है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने आठ जिलों को रेड जोन में रखा है। इन जिलों ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों का 50 प्रतिशत लक्ष्य भी पूरा नहीं किया गया है। इनमें जांजगीर चांपा नंबर-1 पर है। यहां सभी राष्ट्रीय कार्यक्रम का केवल 36 फीसदी लक्ष्य पूरा हो सका है। रेड जोन वाले जिलों में 50 प्रतिशत लक्ष्य के अनुसार मरीजों की जांच और इलाज नहीं किया गया है। नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य संचालनालय में पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा की जा रही है। सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के अलावा सिविल सर्जन भी समीक्षा बैठक में हाजिर हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया और संचालक संजीव झा के सामने पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिये हर जिले में चल रहे राष्ट्रीय कार्यक्रमों की समीक्षा की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- मोबाइल मेडिकल यूनिट की मॉनीटरिंग हर हाल में करें
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दुर्गम क्षेत्रों में चलायी जा रही 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट की नियमित मॉनीटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस करते हुए यह सुविधा दी जा रही है। अफसर लगातार फीडबैक भी लें कि सुविधा दुरुस्त है या नहीं? मंत्री ने कहा कि 102 महतारी, 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 1099 से संबंधित शिकायतों का समाधान होना चाहिए। नए जांच उपकरणों की खरीदी कर सभी अस्पतालों में जांच सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
बाजार की दवा लिखने वाले सरकारी अस्पताल के डाक्टरों पर होगी कार्रवाई
सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को बाहर की दवा लिखने वाले डाक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई अस्पतालों के डाक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। जबकि अस्पतालों में दवाएं उपलब्ध रहती हैं। ऐसे डाक्टरों की पहचान कर उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। हर ब्लॉक में डायलिसिस यूनिट स्थापित की जाएगी। इसके लिए भी स्वास्थ्य मंत्री ने संकेत दिए। उन्होंने इसके लिए हेल्थ अफसरों को तैयारी करने को कहा। रेड जोन वाले जिले: जांजगीर-चांपा, मोहला-मानपुर, बेमेतरा, मुंगेली, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, महासमुंद, सक्ती, रायपुर। जिन जिलों की स्थिति सामान्य से ज्यादा खराब: राजनांदगांव, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोंडागांव, दुर्ग, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, दंतेवाड़ा, कोरिया, गरियाबंद, बीजापुर, बलरामपुर, बलौदाबाजार।

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