जोधपुर नगर निगम के पुराने कार्यालय में करीब 20 सालों से बंद पड़ी एक तिजोरी को खोला गया। लेकिन यह उस वक्त चर्चा और मजाक का कारण बन गई जब तिजोरी के अंदर से महज एक रुपया निकला जबकि इसे खुलवाने का खर्च ढाई हजार रुपए आया। दरअसल, पुराने कार्यालय की साफ-सफाई और रिकॉर्ड वेरिफिकेशन के दौरान अधिकारियों को यह तिजोरी दिखाई दी। जानकारी के अनुसार यह तिजोरी साल 2005 में लाई गई थी और उसके बाद से कभी नहीं खोली गई। समय के साथ इसकी चाबी भी उपलब्ध नहीं रही, जिसके चलते निगम इसे तकनीकी तरीके से खुलवाने का निर्णय लिया गया। 1982 का सिक्का मिला तिजोरी खोलने के लिए शुक्रवार को एक कारीगर बुलाया गया। खोलने के आवश्यक उपकरण मंगवाए गए और सुरक्षा व्यवस्था की गई। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग ₹2,500 का खर्च आया। काफी मशक्कत के बाद जब तिजोरी खुली तो न तो कोई अहम दस्तावेज मिला और न ही कोई नकद राशि। अंदर सिर्फ 1982 का एक रुपये का सिक्का मिला। तिजोरी खुलते ही यह नजारा वहां मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए हैरानी के साथ-साथ हंसी का भी कारण बन गया। वर्षों से बंद पड़ी तिजोरी से महज एक रुपये का निकलने की बात सुन हर किसी के चेहरे पर थोड़ी हंसी आ गई।


