हजारीबाग जिले में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा बहाल कराने को लेकर छह करोड़ 66 लाख प्राक्कलित राशि से बनने वाले स्वास्थ्य विभाग की दो भवन डेढ़ दशक से अधूरा है या फिर घोटाले की भेंट चढ़ गए हैं। एक अर्ध निर्मित भवन शहर में है और दूसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केरेडारी है। मई 2008 में शहर के दीपूगढ़ा सीएस आवास के पीछे तीन एकड़ भूभाग में शिशु मातृ अस्पताल भवन बनाने की स्वीकृति हुई थी। जिसका प्राक्कलन 3 करोड़ 53 लाख 59000 था। यह भवन बनकर तैयार हो गया सिर्फ प्लास्टर दरवाजा खिड़की और फिनिशिंग का काम बाकी था लेकिन इसका निर्माण घोटाले की भेंट चढ़ाया। आज इस भवन की स्थिति यह है कि दो दर्जन से अधिक लोगों ने इस भवन को कब्जा कर लिया है यहां तक की अपना बिजली कनेक्शन और बोरिंग तक लगवा लिया है। खुद से दरवाजा खिड़की लगाकर उस भवन में लोग रह रहे हैं जबकि जिस जमीन में उक्त भवन खड़ा है। उस जमीन का मूल्य करोड़ों में है। सितंबर 2022 में लगातार दैनिक भास्कर में अवैध कब्जा की खबर छपा था। तब जिला प्रशासन के द्वारा इसकी जांच कर खाली कराने की बात कही गई थी लेकिन आज तक प्रशासन उस ओर देखने का भी समय नहीं निकाल पाया। अब स्थिति यह है कि भवन पर कब्जा के बाद अब वहां खाली पड़े जमीन पर भी लोगों की नजर है। 16 साल हो गए ना ही उस भवन के निर्माण को पूरा करने की ओर विभाग विचार किया और ना ही उस भवन और जमीन को बचाने के लिए किसी तरह की कोशिश हो रही है। वहीं केरेडारी प्रखंड मुख्यालय में 3 करोड़ 14 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण कराया गया ।यह योजना वर्ष 2011-12 की थी। अस्पताल भवन बनकर तैयार भी हो गया। सिर्फ स्टाफ क्वार्टर बनना बाकी था की संवेदक को अग्रिम राशि नहीं मिलने के कारण स्टाफ क्वार्टर नहीं बन पाया। वही यह भवन उस जगह बनाया गया जहां पहुंच पथ नहीं था। जिसके कारण इस भवन का उपयोग भी नहीं हो पाया। हालांकि अब उस अस्पताल भवन तक सड़क का निर्माण हो गया है। बावजूद इसके उसका उपयोग इसलिए नहीं हो पा रहा है कि वह भवन प्रशासन को अब तक हैंडओवर नहीं हो पाया। इस संबंध में उपायुक्त नैंसी सहाय से बात करने की कोशिश हुई लेकिन संपर्क नहीं हो सका। एसी संतोष कुमार सिंह से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जानकारी ली जाएगी की क्या मामला है।


