प्रदेश में कई जमीनों का कौड़ियों के भाव किया एग्रीमेंट अर्बन सीलिंग एक्ट भले ही 24 साल पहले रद्द हो चुका है, लेकिन इसमें भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और उज्जैन समेत प्रदेशभर के करीब 7000 जमीनी मामले अब तक उलझे हुए हैं। कुछ मामले कलेक्टर कार्यालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ। भोपाल में बैरागढ़, श्यामला हिल्स, मिसरोद, कोहेफिजा, खानूगांव, भानपुर, बैरसिया आदि इलाकों में ऐसे कई मामले हैं। एक बार सीलिंग शब्द जुड़ने के बाद ऐसी जमीनें न तो बिक सकी न उन पर निर्माण हो पाया। हालांकि कई शहरों में मामला सुलझाने का दावा करके बिल्डरों ने इन जमीनों को कौड़ियों के भाव एग्रीमेंट करके ले लिया। अवैध निर्माण भी कर दिए हैं। वकीलों का आरोप- निरस्त होने से पहले जिलों में विवादित जमीनों के पंचनामे मंत्री बोले- किसी को दिक्कत हो तो आकर मिले, पूरी मदद करेंगे भोपाल में सैकड़ों मामले लंबित वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीश छवानी के मुताबिक लाउखेड़ी में स्थित गीता प्रसाद मीणा की जमीन पर सालों पहले प्रशासन ने सीलिंग एक्ट में दावा किया था। 2017 में मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और दावा खारिज हुआ। छवानी ने कहा कि 2000 में निरसन एक्ट लागू होने के पहले कुछ जिलों में वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बगैर दफ्तर में बैठक करके विवादित जमीनों का भौतिक पंचनामा कर दिया गया। यह मामले विवादित हैं। जबलपुर में साल 2011 से लगातार 1246 भूस्वामी प्रशासन से लड़ रहे हैं। सीलिंग पीड़ित किसान समिति के बैनर तले किसान हाई कोर्ट तक जा चुके परंतु विवाद नहीं निपटा। ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन में भी विवाद ग्वालियर में हाल में थाटीपुर, गोल पहाड़िया, नारायण विहार आदि में सीलिंग से मुक्त जमीन पर 150 मकान बन चुके हैं। हाल में प्रशासन ने इन्हें नोटिस दिए हैं। इंदौर में 700 एकड़ जमीन पर खजराना, सिरपुर और छोटा बांगड़दा के सैकड़ों मामले सीलिंग के हैं। उज्जैन में घट्टिया में 23 एकड़ जमीन सीलिंग में कब्जेदारों से वापस लेने में प्रशासन को 44 साल लगे। अभी भी सैकड़ों मामले लंबित हैं। जमीन के भौतिक पंचनामे के पहले नोटिस जरूरी
अधिवक्ता राजेश पंचोली के मुताबिक सीलिंग में विवादित जमीन का भौतिक पंचनामा कर ही प्रशासन कब्जा ले सकता है। एक्ट की धारा 10 (5) में 10 दिन का नोटिस भूस्वामी को देते हैं। धारा 8 में जांच होनी चाहिए कि भूमि का लैंडयूज क्या है। पंचनामे में गवाह सहित भू स्वामी उपस्थित होना चाहिए। ^ये एक्ट तो पहले ही रद्द हो चुका है। किसी के मामले अभी उलझे हैं तो आकर मिल सकते हैं, पूरी मदद करेंगे। जिलों में भी समीक्षा में सभी की सुनवाई होती है।
-करण सिंह वर्मा, राजस्व मंत्री 1999 में केंद्र ने खारिज किया था सीलिंग एक्ट: 1976 में केंद्र ने शहरी इलाकों में बड़ी मात्रा में जमीनें कुछ गिने-चुने लोगों के पास होने से रोकने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट पारित किया था। उद्देश्य था कि शहरों में जमीनों पर हक कुछ ही लोगों का न रहे। केंद्र ने 1999 में तो मप्र ने साल 2000 में इस एक्ट को निरस्त कर दिया था।


