चंडीगढ़ इस्पेक्टर को 15 दिन गहने पहनने की मिली इजाजत:CBI कोर्ट सुनवाई, 16 फरवरी जमा करने के आदेश, CBI की मौजूदगी में खुलेगा लॉकर

सीबीआई की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर हरिंदर सिंह सेखों की पत्नी परमजीत कौर को उनके भतीजे की शादी के लिए बैंक लॉकर में रखी ज्वैलरी के 15 दिनों के अस्थायी उपयोग की अनुमति दे दी है। अदालत ने साफ किया है कि ज्वैलरी का इस्तेमाल केवल 8 और 10 फरवरी 2026 को होने वाले विवाह समारोहों तक ही सीमित रहेगा और 16 फरवरी 2026 तक इसे अनिवार्य रूप से दोबारा बैंक लॉकर में जमा कराना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि ज्वैलरी के सीमित और नियंत्रित उपयोग से जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, अदालत ने ज्वैलरी की स्थायी रिलीज की अनुमति देने से इनकार कर दिया। SBI सेक्टर-42 के लॉकर से मिलेगी ज्वैलरी अदालत ने एसबीआई सेक्टर-42 स्थित लॉकर नंबर-6 से ज्वैलरी को 15 दिनों के लिए अस्थायी तौर पर सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह लॉकर परमजीत कौर के खाते से जुड़ा हुआ है। सीबीआई जज भावना जैन ने आदेश दिया कि परमजीत कौर को 80 लाख रुपये की अस्थायी सुपरदारी बॉन्ड (एक जमानत के साथ) जमा करनी होगी। इसके साथ ही अदालत ने ज्वैलरी को बेचने, स्थानांतरित करने या किसी भी तरह से छेड़छाड़ करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ज्वैलरी दोबारा जमा होने के बाद बैंक लॉकर फ्रीज ही रहेगा। CBI अधिकारी की मौजूदगी में खुलेगा लॉकर अदालत ने निर्देश दिया कि बैंक लॉकर सीबीआई जांच अधिकारी की मौजूदगी में खोला जाएगा। बैंक मैनेजर को गवाह बनाया जाएगा और ज्वैलरी की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कर अलग से मेमो तैयार किया जाएगा, जिसे केस रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाएगा। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सभी दस्तावेज संबंधित एफआईआर के साथ जोड़े जाएं। सरकारी वकील ने किया विरोध सीबीआई की ओर से सरकारी वकील ने अर्जी का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि दंपती के खिलाफ जांच अभी जारी है। एजेंसी उनके बैंक खातों, संपत्तियों और ज्वैलरी की जांच कर रही है। ऐसे में इस स्तर पर जब्त ज्वैलरी को रिलीज करना जांच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ज्वैलरी रिलीज न किए जाने की मांग की गई। बचाव पक्ष की दलील परमजीत कौर की ओर से बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सीबीआई पहले ही बैंक लॉकर की जांच कर चुकी है और ज्वैलरी का मूल्यांकन पूरा हो चुका है। मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्वैलरी को अपने पास रखना जांच के लिए जरूरी नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि परमजीत कौर ने 1 अक्तूबर 2024 को अपनी इच्छा से लॉकर की चाबियां जांच एजेंसी को सौंप दी थीं। जांच एजेंसी ने लॉकर खोलकर ज्वैलरी का मूल्यांकन किया और इसके बाद उसे जब्त किया गया था।

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