शब-ए- बरात तीन को, आयोजन की तैयारी शुरू

भास्कर न्यूज | गढ़वा जिला मुख्यालय समेत विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के प्रमुख पर्वों में शामिल शब-ए-बरात का त्योहार तीन फरवरी को मनाया जाएगा। मुस्लिम बस्तियों में इस त्योहार को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। इस क्रम घरों की साफ सफाई के साथ कब्रिस्तानों को साफ सफाई की जा रही है। इस संबंध में बताया गया कि इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक शब-ए-बरात का त्योहार शाबान महीने की 15वीं शब को मनाया जाता है। इस दिन जगह-जगह नजर व नियाज का सिलसिला जारी रहता है। वहीं मुसलमान पूरी रात जाग कर अल्लाह की इबादत करते हैं। कब्रों पर फातेहा पढ़ने के साथ ही चिरागा किया करते हैं। इस्लामी किताबों व उलेमाओं ने शब-ए-बरात की रात को बहुत अहमियत वाला बताया है। उसमें बताया गया है कि शब का अर्थ रात होता जबकि बरात के माने बरी होना या निजात पाना होता है। ऐसे में यह खास पर्व की खास रात गुनाहों से छुटकारा पाने की रात है। इस मौके पर बन्दा अपने रब को राजी करने के लिए पूरी रात रतजगा कर के अपने गुनाहों की माफी के लिए रोता और गिड़गिड़ाता है। वहीं अल्लाह की इबादत करता है। इस रात की इतनी फजीलत है कि अल्लाह अपने बन्दों की दुआओं को रद्द नहीं करता। इस तरह शब-ए-बरात इबादत व रियाजत के लिहाज से न केवल अपनी खास अहमियत रखता है। बल्कि लोगों के लिए यह आत्म चिंतन का भी पर्व है। चूंकि इस महीने के खत्म होते ही मुस्लिमों का सबसे अफजल और बरकत वाला महीना रमजान शुरू होता है। शाबान महीने के शुरू होते ही हर तरफ रमजान के आमद की खुश्बू बिखरने लगती है। वहीं लोग उस की तैयारियों में जुट जाते हैं। शाबान रमजान के मुबारक महीना के इस्तकबाल का जामा मस्जिद इराकी मोहल्ला के पेश इमाम हाफिज अब्दुस्समद ने कहा कि अल्लाह के रसूल ने फरमाया है कि जब शाबान का महीना आ जाए तो अपने बदन पाक रखो। अपनी नियतें अच्छी रखो। उन्हें हसीन बनाओ। यह रमज़ान के मुबारक महीने के इस्तकबाल का महीना है। इसी महीने की पंद्रहवीं शब को शब-ए-बरात मनाई जाती है। उन्होंने कहा कि अल्लाह के प्यारे रसूल इस महीने में खूब रोजा रखा करते थे। उन्होंने कहा कि शब-ए-बरात एक ऐसी रात है। जिसमें की गई दुआएं, इबादतें और हाजतें अल्लाह कबूल फरमा लेता है। उन्होंने कहा कि शब-ए-बरात दो शब्दों, शब और बरात से मिलकर बना है, जहाँ शब का अर्थ रात होता है। वहीं बरात का मतलब गुनाहों से बरी होना होता है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार यह रात साल में एक बार शाबान महीने की 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है। मुसलमानों के लिए यह रात बेहद फज़ीलत की रात मानी जाती है। इस दिन सारे मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। वे दुआएं मांगते हैं और अपनी गुनाहों का तौबा करते हैं।

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