प्रभु श्रीराम ने मर्यादा में रहकर जिम्मेदारी निभाई

भास्कर न्यूज | रांका रांका में पांच दिवसीय नवधा रामायण समारोह में बाहर से आए मानस मंडलियों ने रामचरितमानस के भक्ति रूपी संदेश का प्रवाह किया। समारोह के पांचवें दिन तुलसी के संदेश मानस परिवार, बागबाहरा (महासमुंद) की मंडली ने भगवान राम के जीवन चरित्र की प्रस्तुति दी। गीत-संगीत के माध्यम से बताया कि रामायण जीवन जीने की शिक्षा देती है। कहा कि प्रभु श्रीराम ने प्रेम, दया और समानता के भाव से मर्यादा में रहते हुए पुत्र, पति, भाई और राजा की जिम्मेदारियां पूरी की, इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। मंडली ने बताया कि रामायण की सबसे बड़ी सीख यह है कि बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है। बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अच्छी नियत और गुणों के कारण अंततः सत्य की विजय होती है। नयनतारा बालिका मानस परिवार, खरोरा की मंडली ने कहा कि सत्संग से प्राप्त सुख संसार में कहीं नहीं मिलता और दुख से बड़ा कोई दुःख नहीं है। इस दौरान महासमुंद, बिलासपुर, कवर्धा, बलौदा बाजार, राजनांदगांव, मुंगेली, गरियाबंद, बालोद सहित आसपास के दूर-दराज गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामकथा सुनने आए। समापन अवसर पर 101 ज्योति प्रज्ज्वलित: पांच दिवसीय नवधा रामायण का अंतिम दिन हवन पूजन और आरती के साथ सम्पन्न हुआ। इस दौरान 101 ज्योति का प्रज्वलन किया गया। श्रद्धालुओं ने चढ़ोत्तरी में धान, चावल और नगद राशि अर्पित की। समापन समारोह में खुबीराम महाराज, रामप्रसाद निषाद, दिनेश साहू, सुदर्शन निषाद, पुरुषोत्तम साहू, धनंजय यादव, भगवती निषाद, अवध राम साहू, महोब्बत साहू, जितेंद्र साहू, घनाराम निषाद, चोवाराम साहू मौजूद थे।

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