भास्कर न्यूज| चाईबासा पुराना उपायुक्त कार्यालय के समक्ष शुक्रवार को आदिवासी हो समुदाय के विभिन्न गैर राजनीतिक संगठनों ने आदिवासियों की पारंपरिक, सामाजिक, रूढ़िजन्य स्वशासन प्रथा से संगत पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्र में विस्तार) अधिनियम 1996 को अक्षरशः लागू करने सहित अन्य मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना दिया। इसके उपरांत एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल के नाम उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा को 10 सूत्री मांग पत्र सौंपा। जिसमें झारखंडियों की पारंपरिक, सामाजिक, स्वशासन प्रथा से संगत पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्र में विस्तार) अधिनियम 1996 को अक्षरशः लागू करने, झारखंडियों की भाषा-संस्कृति, लिपि का विकास, संरक्षण और संवर्द्धन करने के साथ ही बहुलता के आधार पर राज्य के सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में भाषा व सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना करने, कोल्हान विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की नियुक्ति, टाटा कॉलेज चाईबासा में विधि संकाय की स्थापना, कोल्हान में प्रवृत्त मानकी-मुंडा व ग्रामसभा से सहमति लिए बगैर विकास परियोजना यथा रेल, रोड, ईचा खरकई बांध, कंपनी, मोजोडिबा जैसे संस्थान के नाम पर झारखंडियों को विस्थापित नहीं करने, राज्य सरकार के प्रतिष्ठानों के सभी विभाग में स्थायी नियुक्ति, खनिज संपदा पर झारखंडियों की भागीदारी, जमीन, जल, पर्यावरण संरक्षण के साथ ही कृषि उद्योग, वनोपज जैसे अन्य लघु उद्योग से किसानों को जोड़ने, शहीद पार्क चाईबासा में इसी वर्ष से शहीद दिवस आयोजित करने समेत अन्य मांगें शामिल हैं। धरना-प्रदर्शन को पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा, सन्नी सिंकू, बलभद्र सवैया, गंगाराम सिंकू, कोलंबस हांसदा, रेयान सामड, रमेश जेराई, कुसुम केराई, मुनेश्वर पूर्ति, मुंडा मधु पूर्ति, मुंडा दीपू सवैया, मुंडा सीडीयू पूर्ति, मुंडा रॉबिन पड़ेया, मुंडा मथुरा दोरायबुरू, महेंद्र जमुदा, नारायण सिंह पूर्ति, अमृत मांझी, सुमंत ज्योति सिंकू, मंगल सरदार, नितीन जामुदा, अलविन एक्का, विशाल गुड़िया, अभिषेक सिरका, अजित गोप, बिरसा गोप, केदारनाथ कालुंडिया, विनीत लागुरी, केशव गोप, राज सिंकू आदि विभिन्न गैर राजनीतिक संगठन के प्रतिनिधियों ने भी धरना को संबोधित किया।


