शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का समापन रविवार को हुआ। कथा का आयोजन नारी शक्ति महिला मंडल और मध्यप्रदेश अग्रवाल महासभा जिला इकाई सीहोर ने किया। अंतिम दिन कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव की कथा मानव को सुख, समृद्धि और आनंद देती है। शिव कल्याण और सुख के मूल स्रोत हैं। वे संपूर्ण विद्याओं के ईश्वर, समस्त भूतों के अधीश्वर, ब्रह्मवेद के अधिपति और साक्षात परमात्मा हैं। पंडित मिश्रा ने कहा कि कथा सुनना सरल है, लेकिन उसमें उतरना कठिन है। यह कला केवल संत ही सिखा सकता है। उन्होंने बताया कि ज्ञान, धर्म और भक्ति का मूल शिव हैं। यश, मान, कीर्ति, नम्रता, सरलता और सत्य – ये पांच दान स्वयं परमात्मा हैं। उन्होंने कहा कि कलयुग वास्तव में करयुग है। जैसी करनी, वैसी भरनी। जो केवल तन और शरीर को देखता है, वह सक्षम नहीं है। सक्षम वही है जो मन और भाव को देखता है। उन्होंने कहा कि संसार और सपने दोनों असत्य हैं। सत्य केवल शिव हैं। कथा के समापन पर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। शिव पार्वती की महिमा के बारे में बताया पंडित राघव मिश्रा ने शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन करते हुए उन सबकी उत्पत्ति के कारण व उनकी महिमा को बताते हुए आज के युग में शिव शक्ति को सबसे अहम व प्रबल बताया। भगवान शिव, जो स्वयं में महाकाल हैं, जिनका काल भी कुछ बिगाड़ नहीं सकता, जिनके दर्शन मात्र से मोक्ष प्राप्ति होती है। वह त्रिकालदर्शी हैं, भूत, भविष्य और वर्तमान के ज्ञाता हैं। पृथ्वी पर वह ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विद्यमान हैं। धार्मिक क्षेत्रों में अलग-अलग जगहों पर उनके 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं।


