फील्डगंज इलाके में घर के बाहर खड़ी एक्टिवा चोरी होने की शिकायत के पूरे 77 दिन बाद जाकर पुलिस ने केस दर्ज किया, जबकि इस दौरान उसी एक्टिवा से 5 आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया गया। हर बार पुलिस असली चोरों तक को नहीं पहुंची लेकिन चोरी के अन्य पीड़ित मालिक के पास जरूर पहुंच गए। उन्हें चोर समझकर बार-बार अपमानित किया। पीड़ित अमित मरवाहा निवासी 12 कुंचा फील्डगंज ने बताया कि 17 नवंबर,2025 को एक्टिवा चोरी होने के तुरंत बाद उन्होंने थाना डिवीजन-2 में सूचना दी, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। इन 77 दिनों में वह 4 बार एसएचओ से मिले। 15 बार शिकायत दर्ज करवाने गए। मगर हर बार उन्हें टाल दिया गया। उधर, पुलिस ने केस दर्ज करने की बजाय हर बार चोरी की अन्य घटनाओं के मामले में अमित को ही पूछताछ के लिए बुलाया। एक बार, एक व्यक्ति उनके घर बेटे को अपमानित कर गया। पीड़ित को बेगुनाही साबित करने को आखिरकार सीपी दफ्तर जाना पड़ा। निर्देश के बाद 1 फरवरी को पुलिस ने केस दर्ज किया। “पुलिस समय से केस दर्ज करती तो मेरे परिवार को अपमानित नहीं होना पड़ता” “मैं अपनी आयल ट्रेडिंग की दुकान पर आने-जाने के लिए में एक्टिवा (PB91F-1678) इस्तेमाल करता हूं। 17 नवंबर की शाम घर के बाहर पार्क एक्टिवा शाम को भीतर रखने लगा, तो एक्टिवा वहां नहीं थी। तुरंत थाना डिवीजन-2 में जाकर मैंने शिकायत दी। मुझे लगा पुलिस कार्रवाई के बाद मामला सुलझ जाएगा, लेकिन असली परेशानी आगे शुरू हुई। कुछ दिन बाद मुझे अनजान व्यक्ति का फोन आया। फोन पर गाली-गलौज कर उसने मुझ पर चोरी का आरोप लगाया। मैंने उसे एक्टिवा चोरी होने की बात कही पर वह मानने को तैयार नहीं था। आखिरकार मुझे उसकी पुलिस से बात करवानी पड़ी, तब जाकर मामला शांत हुआ। 8 दिसंबर को डेहलों इलाके से एक और व्यक्ति का फोन आया। उसने बैटरी चोरी करने और 27 दिसंबर को एक अन्य व्यक्ति ने मुझ पर फैक्ट्री में चोरी का आरोप लगाया। हर बार पुलिस की मदद से सभी को सच्चाई बताई। 18 जनवरी को शिमलापुरी इलाके में गैस सिलेंडर चोरी के मामले में एक व्यक्ति मेरे घर तक पहुंच गया। मैं घर पर नहीं था। उसने मेरे बेटे को अपमानित किया। जब-जब कोई मेरे पास आया, हर बार पुलिस से मैंने एफआईआर की कॉपी देने को कहा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मैं चार बार एसएचओ से मिला, नतीजा शून्य। आखिर मजबूर होकर मुझे सीपी दफ्तर में शिकायत जी तब जाकर पुलिस ने केस दर्ज किया। अगर पुलिस समय रहते मेरी शिकायत पर केस दर्ज कर लेती, तो मुझे और मेरे परिवार को अपमानित नहीं होना पड़ता।” – जैसा अमित मरवाहा ने दैनिक भास्कर को बताया


