भरतपुर। बीमित की मृत्यु के बाद क्लेम राशि का भुगतान नहीं करने पर स्थायी लोक अदालत ने भारतीय जीवन बीमा निगम को पॉलिसी की मूल राशि 10 लाख रुपए मय लाभ-परिलाभ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने तथा 20 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं। एडवोकेट अमर सिंह कुशवाह ने बताया कि गांव सहनावली निवासी अनीता पत्नी स्व. राजबहादुर ने स्थायी लोक अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया। परिवाद में बताया गया कि उनके पति राजबहादुर सिंह ने वर्ष 2022 में 10 लाख रुपए की बीमा पॉलिसी एलआईसी से ली थी। 24 जनवरी 2024 को हार्ट अटैक एवं बीपी लो होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। अनीता पॉलिसी की नामित (नॉमिनी) थीं। मृत्यु के बाद अनीता ने बीमा क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन बीमा कंपनी ने क्लेम को निरस्त कर केवल 1 लाख 1 हजार 535 रुपए का भुगतान 14 जनवरी 2025 को उनके खाते में कर दिया। मामले की सुनवाई के बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष गंभीर सिंह, सदस्य योगेश कुमार शर्मा एवं रजनीकांत शर्मा ने परिवादी के पक्ष में निर्णय देते हुए एलआईसी को आदेशित किया कि वह मूल बीमा राशि 10 लाख रुपए मय लाभ-परिलाभ 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे तथा 20 हजार रुपए क्षतिपूर्ति राशि 6 सप्ताह के भीतर भुगतान करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो मूल बीमा राशि मय लाभ-परिलाभ पर आदेश की तिथि से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।


