भास्कर न्यूज | संगरूर एसएएसवीएम सीसे. स्कूल में जिला सर्वहितकारी शिक्षा समिति व स्थानीय प्रबंध समिति के अध्यक्ष अच्छविंदर देव गोयल की अगुवाई में श्री गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत प्रबंध समिति सदस्यों द्वारा श्री गुरु रविदास जी को पुष्प अर्पित करके की गई। अच्छविंदर देव गोयल ने कहा कि गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी में हुआ। गुरु रविदास जी के गुरु रामानंद जी थे। गुरु रविदास जी की शिष्य विश्व विख्यात कृष्ण भक्त मीराबाई बनी। रविदास जी के जीवन को समझने के लिए उनके कालखंड को समझना अति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रविदास, तुकाराम, संत कबीर, मीराबाई, सूरदास, रसखान व तुलसीदास उस काल खंड में अवतरित हुए। जिस काल खंड में भक्ति लहर पूरे जोरों पर थी। उस काल खंड में प्रत्येक संत ने समाज में सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का कार्य किया। उस कालखंड में सरगुन व एक निर्गुण दो समुदाय थे। सरगुन समुदाय भगवान को भक्ति के रूप में देखते थे और जो निर्गुण समुदाय है वह भगवान को कण कण में मौजूद समझते थे। संत रविदास जी निर्गुण समुदाय के संत थे। गुरु रविदास जी कण कण में भगवान को देखते थे। उन्होंने समाज को सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाया। गुरु रविदास जी का मुख्य उद्देश्य है कि सामाजिक समरसता। विद्यार्थी का लक्ष्य परीक्षा में शत प्रतिशत नंबर लेकर उत्तीर्ण होना चाहिए। इस मौके पर उपाध्यक्ष एडवोकेट जगमोहन ठाकुर ने भी गुरु रविदास जी की जयंती पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उप प्रधानाचार्य अजय गोयल ने कार्यक्रम में उपस्थित प्रबंध समिति सदस्यों का धन्यवाद किया। इस मौके पर भाई कन्हैया सर्वहितकारी सेवा समिति पंजाब के अध्यक्ष सतपाल बांसल, प्रबंध समिति सदस्य राज कुमार जिंदल आदि उपस्थित थे।


