मासूमों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में हाईकोर्ट का केस दर्ज करने का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित नाबालिग बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाने के मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने चाईबासा सदर थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि यदि यह मामला संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है, तो तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही अदालत ने इससे संबंधित रिपोर्ट भी तलब की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता दीपक हेंब्रम की ओर से अदालत को बताया गया कि संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में पहले ही थाना प्रभारी से संपर्क किया गया था, लेकिन अब तक केस दर्ज नहीं किया गया। जबकि यह मामला बेहद गंभीर है और पांच नाबालिग बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया है। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए केस दर्ज करने का आदेश दिया। निलंबन हुआ, पर थाने ने शिकायत लौटाई मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिम्मेदारों को निलंबित तो किया गया, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसको लेकर याचिकाकर्ता दीपक हेंब्रम ने चाईबासा सदर थाना में आवेदन दिया था, लेकिन यह कहते हुए लौटा दिया गया कि मामले में कार्रवाई हो चुकी है। पुलिस-प्रशासन के इस रवैये से नाराज होकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज होगी और मामले की जांच नए सिरे से शुरू की जाएगी। जांच में ब्लड कलेक्शन से लेकर ब्लड ट्रांसफ्यूजन तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल होगी। इसमें जिन-जिन लोगों की भूमिका रही है, उन्हें आरोपी बनाया जाएगा। साथ ही यह भी जांच होगी कि ट्रांसफ्यूजन से पहले किस स्तर पर जांच में लापरवाही बरती गई। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और मामले की लगातार निगरानी करने की बात कही है। 5 बच्चों को चढ़ाया गया था एचईवी संक्रमित खून चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच नाबालिग बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान एचईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था। जांच में पहले एक बच्चे में एचईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। इसके बाद उसी दिन जिन बच्चों को खून चढ़ाया गया था, सभी की जांच कराई गई। जांच के बाद चार और बच्चों में एचईवी संक्रमण की पुष्टि हुई। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने सिविल सर्जन सहित जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया था। साथ ही पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया गया था।

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