एसआईआर में 134 एईआरओ व 1935 बीएलओ सहित और भी स्टाफ लगा है। इसके बाद भी जिले की पोजिशन ठीक नहीं है। गुरुवार को एसआईआर की सुनवाई के आधार पर जो रैंक जारी हुईं उसमें ग्वालियर नीचे से 7वें नंबर पर रहा। फिसड्डी जिलों में अंचल के मुरैना-श्योपुर भी शामिल रहे हैं। अंचल के दतिया, भिंड और शिवपुरी जिले ग्वालियर से आगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार नो मैपिंग, लॉजिकल एरर के जिले में कुल वोटर 3 लाख 33 हजार 164 है। इनमें से 79 हजार 308 की सुनवाई हो चुकी है। अगले 9 दिन अर्थात 14 फरवरी तक 2 लाख 53 हजार 856 वोटरों की सुनवाई होना है जो मौजूदा रफ्तार के हिसाब से मुश्किल है। जिले में ऐसे भी 52 हजार 426 वोटर हैं जिन्हें अधिकारी नोटिस जारी करने का दावा तो कर रहे हैं पर वे पहुंचे नहीं हैं। यह संख्या हर दिन बढ़ रही है। एक दिन पहले इनकी संख्या 37 हजार 766 थी जो एक दिन बाद ही 14 हजार 660 बढ़ गई। परेशानी के 3 केस… अफसर नहीं दे रहे हैं ध्यान, कही नोटिस देर से कहीं तारीखे पहले हेम सिंह की परेड पर रहते हैं श्याम राजौरे। इनके परिवार में 12 वोटर हैं पर लॉजिकल एरर का नोटिस सिर्फ 3 को पहुंचा है। इसमें पिता-पुत्र की उम्र में 15 साल का अंतर, पिता का नाम 2003 एसआईआर से मैच नहीं होने का जिक्र है। बीएलओ 5 फरवरी को सुनवाई का नोटिस देकर चला गया। गुब्बारा फाटक के पास रहते हैं अशोक पाल। बीएलओ इनके घर 3 फरवरी को नोटिस डाल गया कि कलेक्ट्रेट पहुंचे। सुनवाई की तारीख 2 फरवरी लिखी है। नोटिस उनकी पत्नी ऊषा के नाम पर है। इनसे 1987 के पहले का दस्तावेज मांगा है। पाल ने बीएलओ को फोन लगाया पर वे उठा नहीं रहे हैं। हेम सिंह की परेड क्षेत्र में सिंधी बाहुल्य कई कॉलोनी-बस्ती हैं। यहां के लोगों ने कहा कि बीएलओ करीब 200 लोगों से दस्तावेज ले गया। बाद में उसे हटाकर दूसरे कर्मचारी को बीएलओ बना दिया है। पुराने बीएलओ ने फीडिंग नहीं की है, वह फोन भी नहीं उठा रहा है। नए को कुछ पता नहीं है। (नोट-लॉजिकल एरर निपटाने बीएलओ को वोटर के घर पहुंचना है पर वे ऐसा न कर सिर्फ नोटिस डाल रहे हैं)


