आपके क्रेडिट-डेबिट कार्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और आमदनी की गोपनीय जानकारी खुलेआम वेबसाइटों पर बिक रही है। इंटरनेट पर कई डेटा बेचने वाली कंपनियां हैं, जहां से उपभोक्ताओं के बैंक अकाउंट और आधार-पैन की पूरी डिटेल साइबर अपराधियों तक बेधड़क पहुंच रही हैं। फल-सब्जियों की तरह बैंक अकाउंट होल्डरों की जानकारी देने का रेट भी तय है। मोटी कमाई वाले ग्राहकों के डिटेल्स का रेट अधिक तो कम आमदनी वाले का रेट कम है। इसका खुलासा हाल में ही गिरफ्तार साइबर अपराधियों ने किया। इसके बाद दैनिक भास्कर ने गोपनीय डेटा बेचने वालों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। भास्कर रिपोर्टर ने खरीदार बनकर बल्क डाटा बेस डॉट इंफो वेबसाइट पर दर्ज फोन नंबर पर संपर्क किया। कॉल रिसीव करने वाले ने बताया कि जिस राज्य या जिले का डाटा चाहिए, मिल जाएगा। झारखंड में एसबीआई के तीन हजार क्रेडिट कार्डधारकों की जानकारी के लिए 1180 रुपए देने होंगे। ज्यादा कमाई वाले व्यक्ति या जिनका बैंक ट्रांजेक्शन बड़ा है, उनके दो हजार कांटेक्ट डिटेल्स के लिए 2360 रुपए की डिमांड की गई। व्हाट्सएप पर चैटिंग के बाद डील फाइनल भी हुई। सैंपल के तौर पर कुछ कांटेक्ट नंबर और डिटेल भेजे भी, जो सही मिले। पर, लोगों की गोपनीय जानकारियों को सोशल मीडिया पर बेचने पर रोक लगाने में न तो झारखंड पुलिस कुछ कर पा रही है और न ही केंद्र सरकार। प्रभारी डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बताया कि दो माह पहले आरबीआई के साथ हुई मीटिंग में ऐसे वेबसाइटों के विषय में जानकारी दी गई थी। हालांकि, कोई कार्रवाई नहीं हुई। सैंपल के नंबर पर कॉल करने पर नंबर असली मिले बल्क डेटा बेस से भेजे गए सैंपल की जांच की गई, तो मोबाइल नंबर असली मिले। एक नंबर पर कॉल करने पर महिला ने रिसीव किया। उनसे खाताधारक के संबंध में पूछताछ करने पर महिला ने बताया कि नंबर मेरे बेटे का है। वह आईटी कंपनी में जॉब करता है। भास्कर के पास ऑडियो रिकॉर्डिंग और वाट्सएप चैट उपलब्ध है डेटा बेचने वाले से वाट्सएप पर डील फाइनल हुई… रिपोर्टर: कितना पैसा लगेगा, पेमेंट का प्रोसेस क्या है? उत्तर: आपको किस प्रकार का डेटा चाहिए? रिपोर्टर: एसबीआई क्रेडिट कार्डधारक और रांची के ऐसे अकाउंट होल्डर, जिनके बैंक खाते में 50 लाख रुपए से ज्यादा जमा हो। या जिसकी आमदनी 10 लाख रुपए से ज्यादा है, उनका डेटा चाहिए। उत्तर: ओके, मिल जाएगा। क्रेडिट कार्डधारकों के लिए तीन हजार व्यक्ति का 1180 रुपए और पूंजीपतियों के लिए दो हजार अकाउंट डिटेल के लिए 2360 रुपए लगेंगे। व्यक्ति ने दोनों डेटा के दो सैंपल भेजे। इसमें 20 लोगों के डिटेल, पता और मोबाइल नंबर और सिविल स्कोर थे। बल्क डाटा बेस डॉट इंफो वेबसाइट से मिले नंबर पर कॉल कर भास्कर ने खरीदा डेटा रिपोर्टर: हैलो आप कौन बोल रही हैं, मुझे कुछ डेटा चाहिए। महिला ने फोन उठाया: मेरा नाम महक है, आपको किस प्रकार का डेटा चाहिए। थोड़ी बातचीत के बाद फोन काट दिया। रिपोर्टर: (दोबारा फोन लगाने पर) महक जी से बात हो रही है। मैं रांची का व्यवसायी हूं। नया कारोबार शुरू किया है। प्रोडक्ट के प्रमोशन के लिए मुझे झारखंड के एसबीआई कार्ड धारकों का नाम, नंबर, पता और सिविल स्कोर का डिटेल चाहिए। कॉल रिसीवर: नहीं, मैं महक की रिलेटिव हूं। आपको जिस तरह का डेटा चाहिए, मिल जाएगा। वाट्सएप पर एक व्यक्ति आपसे संपर्क करेगा। डेटा दुरुपयोग रोकने के लिए आरबीआई को दिया सुझाव -अनुराग गुप्ता, प्रभारी डीजीपी वेबसाइट को प्लेटफार्म के रूप में किया जाता है इस्तेमाल साइबर थाना रांची के पूर्व टेक्निकल ऑफिसर कुमार सौरभ ने कहा कि जस्ट डायल, बल्क डाटा बेस डॉट इन जैसे वेबसाइटों को साइबर अपराधी प्लेटफार्म की तरह उपयोग करते हैं। वहां से डेटा कलेक्ट कर साइबर अपराधी दूसरे को बेच देता है। लोग खुद ही कई साइटों पर अपनी डिटेल अपलोड करते हैं। अनसिक्योर साइटों से गोपनीय जानकारी लीक होती है। प्रभारी डीजीपी ने कहा… साइबर एक्सपर्ट बोले… कोलकाता के एक्सिस बैंक अकाउंट पर यूपीआई से पैसा भेजने को कहा: डील फाइनल हुई तो खुद को महक बताने वाली लड़की ने यूपीआई नंबर भेजा। इसी पर पैसे भेजने को कहा। यूपीआई आईडी गरिमा बजोरिया के नाम पर मिला। अकाउंट कोलकाता के लेक टाउन स्थित एक्सिस बैंक में है। अकाउंट होल्डर का नाम बजोरिया इंफोटेक दर्ज है। पेमेंट के 10 मिनट के अंदर डिटेल्स भेजने का आश्वासन दिया।


