बड़वानी जिले की ग्राम पंचायत देवगढ़ में बच्चे स्कूल जाने की बजाय पालतू मवेशी चराते नजर आ रहे हैं। यह स्थिति खेड़ी फलिया इलाके में अधिक गंभीर है, जहां लगभग 100 से अधिक बच्चे शिक्षा से वंचित हैं और घर की जिम्मेदारियां उठा रहे हैं। इन बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और कलम होनी चाहिए, लेकिन वे लाठी और रस्सी लेकर गाय, भैंस और बकरियों को जंगल में चराने ले जाते हैं। सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया’ और ‘स्कूल चलो अभियान’ जैसे नारे देती है, लेकिन देवगढ़ की यह तस्वीर इसके विपरीत है। ग्रामीण मोहन और इकराम ने बताया कि जिला मुख्यालय से 55 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत देवगढ़ में 2000 से अधिक मतदाता हैं। इसी पंचायत के खेड़ी फलिया इलाके में 275 मतदाता हैं, जिनके 100 से ज्यादा बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। उनका कहना है कि यहां कोई स्कूल नहीं है, और जो निकटतम स्कूल है वह लगभग 5 किलोमीटर दूर है। ग्रामीणों के अनुसार, 5 किलोमीटर दूर स्थित स्कूल तक पहुंचने का रास्ता जंगल से होकर गुजरता है, जो खतरनाक है। जंगली जानवरों का डर भी बना रहता है, जिसके कारण माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराते हैं। स्कूल न जा पाने के कारण ये बच्चे अपना दिन गिल्ली-डंडा और आंटियां खेलने, खेतों में काम करने और पालतू जानवरों को चराने में बिताते हैं। गांव के लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग से अपने इलाके में स्कूल खोलने की मांग की है, लेकिन अब तक न तो स्कूल खुल पाया है और न ही कोई सर्वेक्षण हुआ है। इससे इन बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।


