भास्कर न्यूज | जालंधर अन्नपूर्णा मंदिर कोट किशन चन्द में अन्नपूर्णा जयंती के उपलक्ष्य में भागवत सप्ताह के अंतर्गत अन्नपूर्णा जयंती महोत्सव मनाया गया। आचार्य शिव कुमार ने भगवान श्रीकृष्ण के विवाह की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को आनंद विभोर किया। उन्होंने कहा- सत्राजित के पास सूर्य नारायण की कृपा से एक अद्भुत मणि थी। भगवान श्री कृष्ण ने सत्राजित से वह मणि मांगी। सत्राजित ने मणि देने से इंकार कर दिया। अगले दिन सत्राजित का भाई प्रसेनजित मणि ले कर जंगल में शिकार खेलने गया। वहां उसे एक शेर ने मार दिया और उसका मांस खा लिया। शेर के दांत में मणि की चेन फंस गई। वहीं जामवंत रहता था। उसने शेर को मारकर मणि प्राप्त कर ली। श्रीकृष्ण पर मणि चुराने का आरोप लग गया। श्रीकृष्ण कलंक को धोने के लिए मणि ढूंढते हुए जंगल में पहुंचे। मणि ढूंढते हुए वे एक गुफा में पहुंचे। वहां श्रीकृष्ण और जामवंत जी का 27 दिन युद्ध हुआ। बाद में जामवंत जी ने पहचान लिया कि ये तो मेरे प्रभु श्रीराम हैं। उन्होंने अपनी पुत्री जामवती का विवाह श्रीकृष्ण के साथ कर दिया। इस के बाद आचार्य जी ने कृष्ण और सुदामा की मित्रता की मार्मिक कथा सुना कर सबको भावुक कर दिया। बाद में सब को सुदामा चावल का प्रसाद दिया गया। अन्नपूर्णा जयन्ती के उपलक्ष्य में पंजीरी का प्रसाद दिया गया। इसके बाद भंडारा वितरित किया गया। कथा की शुरुआत से पहले दर्शना एवं विजयकुमार और श्रद्धा एवं राजीव कालिया ने मुख्य यजमान के रूप में पूजन करवाया। इस मौके पर डॉ. अनिल ज्योति, प्रवीण महाजन, राजेश शर्मा एडवोकेट, विपन उप्पल, डॉ. राजेश ज्योति, राकेश वैद, अश्विनी हाण्डा, प्रदीप शर्मा, पं. राकेश शर्मा, हितेंद्र कपूर, हरपाल सिंह, लक्की कपिला, पं.विनय जेतली, पण्डित विष्णु प्रसाद जोशी आदि मौजूद रहे।


