साध्वी प्रेम बाईसा मौत अब भी पुलिस के लिए गुत्थी:SIT जांच में अब तक 37 लोगों के बयान दर्ज, एफएसएल रिपोर्ट से खुलेगा राज?

पश्चिमी राजस्थान की जानीमानी कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पुलिस के लिए अब तक गुत्थी बनी हुई है। जिसे सुलझाने के लिए विशेष जांच दल लगातार छानबीन में जुटी है। मामले की जांच कर रहीं एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि अब तक 37 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें आश्रम के सेवादार, परिजन और मेडिकल एक्सपर्ट्स शामिल हैं। पर्ची और इंजेक्शन पर गहराया सस्पेंस एसआईटी की जांच में सामने आया कि घटना के समय एक पर्ची होने का दावा किया गया था, जिसमें दवाइयों का उल्लेख था। एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि उस पर्ची के के बारे में कंपाउंडर से पुनः गहन पूछताछ की जानी है। कंपाउंडर ने पूर्व में पूछताछ में डेक्सोना सहित कुछ अन्य इंजेक्शन लगाने की बात स्वीकार की है। हालांकि, वो पर्ची कब और किस डॉक्टर ने लिखी थी, उसके बारे में अब तक कोई अहम तथ्य नहीं रख पाए हैं। पिता या सेवादार के पॉलीग्राफ टेस्ट पर चुप्पी इस मामले में डीएनए एक्सपर्ट्स की राय के आधार पर साध्वी के पिता या सेवादार के पॉलीग्राफ टेस्ट को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब पर शर्मा ने स्पष्ट कुछ नहीं कहा। एफएसएल की रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यकता हुई, तो पुलिस अन्य कदम भी उठाएगी। विसरा सैम्पलिंग में लिए गए डीएनए एसीपी शर्मा के अनुसार पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया के दौरान मेडिकल बोर्ड द्वारा साध्वी के गर्भाशय से भी डीएनए सैंपल्स लिए गए थे, जो एक नियमित प्रक्रिया होती है। इस पर पुलिस का कहना है कि वे हर संभावित पहलू और वैज्ञानिक साक्ष्य को खंगालना चाहते हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि हो सके। फिलहाल विसरा और फॉरेंसिक लैब की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। जिसके बाद ही मौत के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा हो पाएगा। मोबाइल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया की जांच जांच टीम अब तक लगभग 40 मोबाइल संपर्कों और उनकी कॉल डिटेल्स खंगाल चुकी है। साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से साध्वी के सोशल मीडिया अकाउंट्स की रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि क्या उन्हें कोई परेशान कर रहा था। उनके उस दिन के पूरे रूट चार्ट और संपर्कों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। एसआईटी: अब तक की जांच के मुख्य बिंदु: बयान: डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, रिश्तेदार और सोशल मीडिया हैंडलर्स सहित 37 लोगों से पूछताछ। वैज्ञानिक जांच: 35 से अधिक सैंपल्स फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए। संदिग्ध: विसरा रिपोर्ट में जहर की पुष्टि होने या बयानों में विरोधाभास होने पर पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रक्रिया शुरू होगी। फोकस: मुख्य जांच ‘मौत के इंजेक्शन’ और घटना के समय मौजूद व्यक्तियों की भूमिका के इर्द-गिर्द घूम रही है। एसआईटी प्रभारी ने विश्वास जताया कि आगामी 7 से 10 दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे रहस्य से पर्दा उठ जाएगा।

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