दावा- रघुनाथ बड़ा मंदिर ट्रस्ट विवाद में निजी और ट्रस्ट संपति अलग-अलग

भास्कर न्यूज | ब्यावर मंदिर श्री रघु नाथजी महाराज ट्रस्ट से जुड़े संपत्ति विवाद को लेकर अब नया मोड़ सामने आया है। पक्षकारों के अनुसार यह मामला लगभग दो शताब्दियों पुराने निजी सम्पति से जुड़ा है। जिसे बाद में कुछ लोगों की ओर से ट्रस्ट की संपत्ति से जोड़ने का प्रयास किया। पक्षकार आशीष शर्मा के मुताबिक वर्ष 1836 में उनके पूर्वजों द्वारा मकान, दुकानों और मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में वर्ष 1958 में जिला न्यायालय अजमेर के फैसले से मंदिर के लिए एक विधिवत ट्रस्ट का गठन किया और शेड्यूल-ए में वर्णित संपत्तियों को ट्रस्ट में शामिल गया। इनमें रघुनाथ जी बड़ा मंदिर, मंदिर के नीचे दुकान नंबर 1/380, चारभुजा नाथ मंदिर व उसके बाहर की दुकानें और गोपाल जी मंदिर छावनी शामिल है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 में कुछ लोगों ने द्वेषतापूर्ण भावना से मंदिर की शिकायत देवस्थान विभाग में की गई। जिसकी जांच 14 वर्ष तक चली, इसके बाद वर्ष 1984 में देवस्थान विभाग की ओर से वर्ष 1958 के जिला न्यायालय के निर्णय के आधार पर ट्रस्ट को उन्हीं संपत्तियों के साथ पंजीकृत किया। संबंधित आदेश सभी संपत्तियों और देवस्थान विभाग के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा किया गया। आरोप है कि कुछ पुजारियों की एक निजी दुकान नंबर 1/376, रघुनाथ जी मंदिर के नीचे, पांच बत्ती है। जिसमें किराएदार सुगनचंद मांगीलाल काबिज थे। पक्षकारों का कहना है कि इस दुकान का ट्रस्ट की संपत्तियों से कोई संबंध नहीं रहा है। आरोप है कि जनवरी 2018 में पंकज बंसल ने फर्म एसएम संस द्वारा फर्जी किराया रसीद तैयार कर दुकान के सह-मालिक आत्माराम त्रिपाटी के फर्जी हस्ताक्षर कर जीएसटी पंजीकरण प्राप्त किया गया। वर्ष 2025 में जब दुकान मालिकों को इस प्रकरण की जानकारी हुई, तो उन्होंने न्यायालय में पंकज बंसल व विकास बंसल के खिलाफ वाद दायर किया, जो वर्तमान में विचाराधीन है। साथ ही जीएसटी विभाग में भी फर्जी दस्तावेज़ से पंजीकरण लेने की जांच जारी है। पक्षकारों का कहना है कि उक्त किराएदार द्वारा इन मुकदमों से बचने के लिए अपने साथी माणक साहू द्वारा देवस्थान विभाग अजमेर में आरपीटी एक्ट की धारा 38 के अंतर्गत पुजारियों जो उक्त दुकान के मालिक है, के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। जिसमें देवस्थान विभाग अजमेर द्वारा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। इसके बाद रघुनाथ मंदिर ट्रस्ट को रिस्पॉन्डेंट बनाया गया। देवस्थान विभाग अजमेर द्वारा पुजारियों को कोई नोटिस जारी नहीं किए जाने की वजह से किराएदार की ओर से धारा 20 में देवस्थान विभाग उदयपुर में पंकज व विकास बंसल ने अपने परिचित मुकेश साहू के माध्यम से अपील कराई। जिसमें दुकान मालिकों को अनावश्यक रूप से परेशान करने के लिए इस विवाद में पक्षकार बनाया गया। शुरुआत से ही मंदिर ट्रस्ट में ब्यावर के गणमान्य नागरिक ट्रस्टी के रूप में कार्य करते आ रहे हैं और पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। मंदिर की व्यवस्थाओं, संपत्तियों एवं वित्तीय मामलों से संबंधित सभी निर्णय और जवाबदेही मंदिर ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन मामलों में किसी भी प्रकार की जांच या प्रश्न सीधे ट्रस्ट से किया जाना चाहिए, न कि पुजारियों या निजी संपत्तियों को इससे जोड़कर देखा जाना चाहिए। साथ ही जिला न्यायालय एवं देवस्थान विभाग दोनों ने अपने फैसलों में यह दर्शाया है कि रघुनाथ मंदिर ट्रस्ट की सम्पत्ति और उनकी निजी संपति अलग-अलग है फिर भी उक्त किराएदार द्वारा कूटरचित एवं षड्यंत्र पूर्वक तरीके से ट्रस्ट की संपति बताने का प्रयास किया जा रहा है।

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