गुरमीत लूथरा | अमृतसर अमेरिका से ट्रेड डील और टैरिफ 50 से घटाकर 18 प्रतिशत करने से भारत के टेक्सटाइल उद्योग को फायदा होने की उम्मीद है। उद्योगपतियों के मुताबिक, भारत से अमेरिका को टेक्सटाइल वस्तुओं के निर्यात 25 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से टैरिफ 18 प्रतिशत करने से भारत का सालाना निर्यात 97 हजार करोड़ की बढ़कर 1.25 लाख करोड़ होने की संभावना है। व्यापार समझौते से जहां टेक्सटाइल उद्योग को फायदा होगा वहीं ज्वेलरी उद्योग को निर्यात में बूस्ट मिलने की उम्मीद नहीं है। सर्राफा स्वर्णकार वेलफेयर एसोसिएशन के पंजाब प्रधान चरणजीत सिंह पूजी ने कहा कि आभूषण व अन्य ज्वेलरी वस्तुओं के निर्यात को लेकर कस्टम ड्यूटी पहले से ही 18 प्रतिशत ही रहने से ज्वेलरी उद्योग को बूस्ट मिलने की संभावना कम ही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा डील से ज्वेलरी उद्योग को फायदा होने की संभावना कम ही है। इस साल बीते बरसों से भी कम निर्यात रहने की संभावना है, क्योंकि आभूषणों पर भी ट्रंप ने टैरिफ 18 प्रतिशत ही निर्धारित किया है। निर्यात किए गए आभूषणों में से जिन आभूषणों का ऑर्डर रद्द हो जाता है अथवा पूरे ऑर्डर का भुगतान नहीं हो पाता है, शेष वस्तुएं की अमेरिका से वापसी पर भी कई कई बरस लग जाने से अमेरिका को निर्यात करने में कई बार ज्वेलर्स को फायदे की बजाय घाटा ही उठाना पड़ता है। इसलिए ज्वेलरी का अमेरिका को निर्यात आगामी बरसों में बढ़ने की बजाए कम रहने की उम्मीद है। टेक्सटाइल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के प्रधान दीपक खन्ना एवं महासचिव राजीव खन्ना ने खुलासा किया कि टेक्सटाइल वस्तुओं के निर्यात में अकेले भारत का अमेरिका को निर्यात शेयर साढ़े 8 प्रतिशत का है। निर्यात होने वाली प्रमुख वस्तुओं में शॉल-कंबल, रेडीमेड गारमेंट्स एवं कपड़ा प्रमुख है। उम्मीद है कि भारत निर्यात में 1.25 लाख करोड़ रुपए सालाना का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 तक हासिल कर लेगा। टेक्सटाइल उद्योग प्रफ्फुलित होने के पूरे आसार हैं। अकेले अमृतसर जिला में ही टेक्सटाइल से संबंधित 600 से अधिक यूनिट हैं। इस डील के बाद आगामी एक दो साल में इन औद्योगिक इकाइयों की संख्या दोगुनी होने की उम्मीद है। अमेरिका के टैरिफ कम करने से निर्यात फिर से तेज होगा, इसके साथ घरेलू बाजार भी बढ़ेगा।


