भानु सप्तमी का व्रत कल . हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी पर होता है आयोजन, पूजा करने से कुंडली दोष होते हैं…

भास्कर न्यूज | जालंधर सनातन धर्म में भानु सप्तमी पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा एवं उपासना की जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार रविवार 8 फरवरी को भानु सप्तमी है। यह पर्व हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर सूर्य देव की पूजा की जाती है। साथ ही जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है। सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सूर्य देव की उपासना करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है। कुंडली में सूर्य मजबूत होने से करियर और कारोबार में सफलता मिलती है। साथ ही आय, आयु, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि जब रविवार के दिन सप्तमी तिथी होती है तो सूर्य नारायण भगवान के पूजन का फल कई हजार गुणा बढ़ जाता है एवं इस दिन सुबह स्नान करने के बाद जल में थोड़े चावल, शक्कर, गुड़, लाल फुल व लाल कुमकुम मिला कर सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए व सूर्य चालीसा पाठ व गायत्री मंत्र करने से यष मान सम्मान कीर्ति की वृद्धि होती है और घातक से घातक बीमारी ठीक हो जाती है। उन्होंने बताया कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव की उपासना करने से न केवल कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है, बल्कि मनुष्य को आरोग्य जीवन का वरदान प्राप्त होता है। अगर आप भी सूर्य देव की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो भानु सप्तमी पर सूर्य देव की विधि विधान से पूजा-उपासना करें। विद्वानों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 7 और 8 फरवरी की मध्यरात्रि 2 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 9 फरवरी को सुबह 5 बजकर 1 मिनट पर समापन होगी। उदयातिथि के आधार पर 8 फरवरी को भानु सप्तमी मानी जाएगी।

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