हाईकोर्ट ने एसआई भर्ती-2021 पेपरलीक केस में आरपीएससी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह गूंगी-बहरी हो गई है। दो-दो भर्तियों में उसके सदस्यों के नाम होने पर भी एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई। यह क्या एक संवैधानिक संस्था है या गूंगे-बहरों की संस्था है, इसका कोई धणीधोरी नहीं है क्या? हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन ने यह मौखिक टिप्पणी मंगलवार को एसआई भर्ती पेपर लीक मामले में की। सुनवाई के दौरान जस्टिस जैन ने वीसी के जरिए पेश हुए आरपीएससी चेयरमैन (कार्यवाहक) कैलाश चंद्र मीणा को फटकार लगाते हुए कहा कि उनके दो सदस्यों का पेपर लीक में नाम शामिल होने पर भी क्या उनकी यह ड्यूटी नहीं थी कि वे इसकी एफआईआर दर्ज कराते। इस दौरान हाईकोर्ट ने चेयरमैन से आरपीएससी में नियुक्त होने वाले सदस्यों की चयन प्रक्रिया व उनकी योग्यता सहित मौजूदा मामले में आरोपी आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा व रामूराम राईका की योग्यता के बारे में भी पूछा। जिस पर अदालत को बताया गया कि बाबूलाल कटारा सांख्यिकी विभाग से और रामूराम राईका कॉलेज में प्रिंसिपल के पद से आरपीएससी सदस्य पद पर नियुक्त हुए थे। कोर्टरूम लाइव कटारा ने मोबाइल से पेपर की फोटाे खींच राईका को भेजी थी सुनवाई के दौरान एसओजी के एडीजी वीके सिंह ने कोर्ट को पेपर लीक होने की पूरी प्रक्रिया व अनुसंधान कार्रवाई की जानकारी दी। बताया कि भर्ती के पेपर वाट्सएप पर जगदीश विश्नोई गैंग ने लीक किया था। एसओजी के पास इसकी 350 शिकायतें आई थीं। बाबूलाल कटारा के पास इसका चार्ज था और उसने अपने मोबाइल से पेपर की फोटाे खींचकर रामूराम राईका को भेजी थी। कोर्ट ने एडीजी से पूछा… भर्ती रद्द करने की सिफारिश क्या डीजीपी की ओपिनियन पर की थी? कोर्ट ने एसओजी एडीजी वीके सिंह से पूछा कि क्या भर्ती रद्द करने की फाइनल ओपिनियन देने के लिए डीजीपी ने कहा था। सिंह ने कहा कि उन्होंने खुद ही पब्लिक इन्ट्रेस्ट में भर्ती रद्द की सिफारिश की थी। वहीं, कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा कि उसके पास भर्ती रद्द करने को लेकर तीन-तीन सिफारिशें आई थीं, लेकिन उन्होंने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। इसके जवाब में राज्य सरकार के एएजी विज्ञान शाह ने कहा कि राज्य सरकार भर्ती को लेकर चल रहे अनुसंधान में नए तथ्यों का इंतजार कर रही है। शेष | पेज 6 मामले में 13 अगस्त 2024 की रिपोर्ट के बाद ही आरपीएससी सदस्यों की भूमिका का पता चला था। जिस पर अदालत ने एएजी को कहा कि सरकार को भर्ती रद्द करने की सिफारिश भेजी गई थी, उसके बाद की यदि कोई नोटशीट हो तो उसे पेश कर दें। इस दौरान प्रार्थी पक्ष की ओर से भी सीनियर एडवोकेट आरपी सिंह ने कहा कि इस मामले में एसओजी जांच से साफ है कि पेपर कई गैंग के पास गया। बड़े पैमाने पर भर्ती का पेपर लीक हुआ। ऐसे में किसी भी सूरत में यह नहीं कहा जा सकता है कि एसआई भर्ती परीक्षा पारदर्शिता के साथ हुई है। वहीं प्रार्थियों की ओर से ईडी को पक्षकार बनाने का प्रार्थना पत्र लगाया। जिस पर अदालत ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है, हम पहले ही ईडी को पक्षकार बनाने के लिए कह चुके हैं। अदालत ने सभी पक्षों को सुनकर मामले की सुनवाई बुधवार को भी जारी रखी है।


