जनवरी में पूरा हो रहा 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल:गांव की सरकार में नया प्रयोग, पहली बार जनप्रतिनिधि हो सकते हैं प्रशासक

प्रदेश के पहली बार जनप्रतिनिधियाें काे प्रशासक लगाने की तैयारी है। दरअसल, 6759 ग्राम पंचायताें का कार्यकाल जनवरी में पूरा हाे रहा है और इनमें प्रशासक लगने हैं। 704 ग्रांम पंचायताें का कार्यकाल मार्च 2025 में पूरा हाेगा, इनमें भी प्रशासक लगेंगे। भजनलाल सरकार प्रदेश में वन स्टेट वन इलेक्शन के माेड में है। ऐसे में एक साथ चुनाव कराने काे लेकर एमपी, झारखंड और हाल में उत्तराखंड में अपनाए गए फॉर्मूले का अध्ययन कर सरकार ऐसा करने जा रही है। मालूम हो कि मतदाता सूचियां तैयार करने और चुनाव कार्यक्रम जारी करने में तीन माह का समय लगता है। जनवरी 2025 में ड्यू हाे रहे 6759 ग्राम पंचायताें के चुनाव अब संभव नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में प्रशासक लगाना ही अंतिम विकल्प है। 25 नवंबर काे 49 निकायाें में कार्यकाल पूरा हाेने के चलते प्रशासक लगने की शुरुआत हो गई थी। हालांकि, इसके लिए सरकार के समक्ष असंताेष भी सामने आया है। एमपी, झारखंड, उत्तराखंड में भी पूर्व सरपंचों को बना दिया था प्रशासक निकायाें को छोड़, पंचायती राज में सरपंच से लेकर प्रधानी तक लागू: कई राज्याें में पंचायती राज में प्रशासक की जगह पुराने जनप्रतिनिधि काे बरकरार रखा जाता है। ऐसे में उस प्रशासक के पास वित्तीय और प्रशासनिक पावर रहते हैं। बताया जाता है कि इस फाॅर्मूले से जनता की मांगाें काे ध्यान में रखकर विकास कराया जाता है। निर्वाचन आयाेग की तैयारी राज्य निर्वाचन आयाेग ने अभी तैयारी नहीं की है। चुनावी बूथाें के लिए पत्र व्यवहार कलेक्टराें से किया गया है। हालांकि, ये रुटीन प्रक्रिया है। अगर चुनाव होते हैं तो आयाेग काे पहले लंबित पड़े चुनाव कराने हाेंगे। यानी पहले 49 निकायाें काे प्राथमिकता देनी हाेगी, फिर पंचायत चुनाव की बारी आएगी। चुनाव से पहले परिसीमन की मशक्कत करनी होगी
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग काे राज्य निर्वाचन आयाेग ने नए जिलाें से जुड़े परिसीमन आदि काे लेकर करीब चार रिमाइंडर पत्र भेजे हैं। लेकिन, चुनाव कराने से संबंधित क्षेत्राें का निर्धारण आदि काे लेकर काेई जवाब अब तक नहीं मिला है। दूसरी ओर, भजनलाल सरकार में पिछली सरकार में बनाए गए नए जिलाें काे खत्म करने काे लेकर फैसला हाेना शेष है। भास्कर एक्सपर्ट : पंचायती राज एक्ट 95 में कुछ परिस्थितियाें में राज्यों को यह अधिकार
राजस्थान सरपंच संघ के पदाधिकारी रफीक पठान का कहना है कि सरकार अपनी शक्तियाें का उपयाेग करते हुए सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुखाें के कार्यकाल काे बढ़ा सकती है। तीन राज्याें ने ऐसा किया भी है, इसकी डिटेल तीन महीने पूर्व ही हम सरकार काे साैंप चुके हैं। उम्मीद है कि प्रदेश में भी ऐसा हाेगा। हमारा मानना है कि इससे विकास की रफ्तार बरकरार रहेगी। वैसे भी 2800 कराेड़ रुपए की राशि बाकी है, जिससे गांवाें का विकास कराया जा सकता है। इसके अलावा सरपंचाेंं के पास विकास मद में फंड बचा है, जिसका उपयोग प्रशासक के तौर पर किया जा सकता है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *