उदयपुर की एसीबी कोर्ट ने रिश्वत के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने डूंगरपुर जिले की धम्बोला थाना क्षेत्र की वेजा में तैनात पुलिस चौकी के हेड कांस्टेबल बखत सिंह को भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश मनीष अग्रवाल ने दोषी को एक साल के साधारण कारावास और कुल 20 हजार रुपए के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। करीब 15 साल पहले 2 अप्रैल 2011 को कार्रवाई करते हुए एसीबी टीम ने बखत सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। दरअसल परिवादी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ACB में शिकायत दर्ज कराई थी। मणीलाल ने बताया था कि उनके परिवार के सदस्यों के बीच हुए एक झगड़े की जांच बखत सिंह कर रहे थे। इस केस की रिपोर्ट में से मणीलाल और उनकी पत्नी का नाम हटाने के बदले में हेड कांस्टेबल बखत सिंह ने रिश्वत की मांग की थी। मामला 4000 रुपए में तय हुआ था। एसीबी ने शिकायत के बाद जाल बिछाया और 2 अप्रैल 2011 को कार्रवाई करते हुए बखत सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। हेड कांस्टेबल की पेंट की जेब से रिश्वत की राशि बरामद हुई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस गवाह और सबूत पेश किए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एक लोक सेवक होकर रिश्वत लेना गंभीर अपराध है। अदालत ने आरोपी बखत सिंह को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अलग-अलग धाराओं में एक-एक वर्ष की जेल और जुर्माने की सजा दी। जुर्माना नहीं भरने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि समाज में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल दोषी बखत सिंह की उम्र 63 वर्ष हो चुकी है।


